चीनी विदेश मंत्री वांग यी आज भारत दौरे पर पहुंचे और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की
वांग यी की मुलाकात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के प्रमुख अजीत डोभाल से भी होगी
चीनी विदेश मंत्री अफगानिस्तान और पाकिस्तान की यात्रा का भारत पहुंचे हैं वांगी की मुलाकात राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के प्रमुख अजीत डोभाल से भी होगी मई 2020 से भारत के पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीनी सैनिकों की घुसपैठ के बाद दोनों देशों के रिश्तो में आई कड़ा कड़वाहट को देखते हुए चीनी विदेश मंत्री की यह यात्रा काफी अहम वैभवपूर्ण मानी जा रही है
चीनी सरकार की तरफ से विदेश मंत्री की मुलाकात के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से समय मांगा गया है वांग यी की इस यात्रा का सबसे उल्लेखनीय पहलू यह है कि उनके विमान के पालम एयरपोर्ट पर पहुंचने तक किसी भी तरह की कोई अधिकारिक तौर पर ना ही भारत की तरफ से किसी तरह की कोई जानकारी दी गई विमान पहुंचने के करीब 1 घंटे बाद विदेश मंत्रालय के सूत्रों से इतनी जानकारी मिली कि शुक्रवार 11:00 बजे दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात तय की गई है
इस यात्रा की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गलवन घाटी में चीन की घुसपैठ के बाद दोनों देशों के बीच कोई अधिकारिक कूटनीति की यात्रा नहीं हुई ना ही किसी बड़े नेता की यात्रा हुई
वांग यी ने कश्मीर पर सख्त टिप्पणी की थी
वांग जी और विदेश मंत्री जय शंकर के बीच मुलाकात रूस में हुई और 3 बार उनके बीच टेलीफोन पर भी बात हुई भारत में आने से पहले ही वांगयी पाकिस्तान में थे जहां उन्होंने ओआईसी की बैठक में कश्मीर के खिलाफ टिप्पणी की थी
जिस पर भारतीय सरकार ने बहुत ही सख्त प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें ऐसा ना करने का चेतावनी दी थी गलवन में सैनिकों की घुसपैठ जून में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई खूनी भिड़ंत के बाद भारत और चीन के रिश्ते काफी बिगड़ चुके हैं दोनों तरफ से अभी भी तकरीबन 200000 सैनिक पूर्वी लद्दाख स्थित वास्तविक नियंत्रण रेखा एलओसी पर तैनात है सैनिकों की वापसी और मई 2020 से पूर्व की स्थिति बाल करने के लिए दोनों देशों के बीच सैन्य कमांडर स्तर पर अभी तक 15 दौर की बातचीत हो चुकी है
पिछले दो दौर की वार्ता में जनवरी और मार्च 2022 काफी सकारात्मक माहौल में हुई है सैनिकों की वापसी को लेकर सहमति बन सकती है गैर आधिकारिक तौर पर कुछ अधिकारियों ने यह भी बताया कि सैनिकों की वापसी को लेकर कुछ दोनों देशों ने सहमति बनाई है
इससे पहले वर्ष 2017 में डोकलाम भूटान भारत चीन सीमा स्थित वे दोनों देशों के बीच दोनों तरफ के सैनिकों में काफी गहमागहमी हुई और स्थिति काफी तनावपूर्ण रही अब अप्रैल 2018 में प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अनौपचारिक मुलाकात के बाद रिश्तो में काफी बदलाव हुआ था
गलवन घुसपैठ के कारण बिगड़ गए थे रिश्ते
उनके बीच दूसरी और अंतिम अनौपचारिक मुलाकात नवंबर 19 में इन्हीं के पास हुई थी इसमें यह निर्णय हुआ था कि 2020 में अगली मुलाकात होगी लेकिन गलवन घाटी में हुई चीनी सैनिकों की घुसपैठ व तनाव के रिश्तो में बहुत ज्यादा कड़वाहट आ गई थी और हालात बिगड़ गए थे
तब से अब तक दोनों देश के दोनों नेताओं के बीच किसी भी तरह की बातचीत नहीं हुईं ना ही किसी मसले को लेकर चर्चा हुई यह मुलाकात दोनों देशों के रिश्तो को एक बार फिर से सामान्य बनाने में मददगार साबित होगी वहीं चीन की ओर से दबाव बनाया गया इसका जवाब शुक्रवार को वांग यी और जयशंकर के बीच मुलाकात से निकल सकता है विशेषज्ञ वांग यी के इस दौरे को दोनों देशों की तरफ से रिश्तो को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हैं
खास तौर पर जब यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वैश्विक व्यवस्था भी कई बड़े बदलाव की बात सरकार और कूटनीतिक विश्लेषक कर रहे हैं यह भी बताया जा रहा है कि चीन की तरफ से ज्यादा दबाव बनाया गया है
वांग यी भारत के दौरे के बाद देर रात नेपाल जाएंगे उनके बांग्लादेश जाने की भी संभावना है वांग यी की यात्रा को चीन की तरफ से दक्षिण एशिया में चीन की तस्वीर वह उसके इरादों को सुधार करने और अपनी महत्वकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव की दिक्कतों को दूर करने के तौर पर भी देखा जा रहा है चीन फिर से बीआरआई पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन कर रहा है
इंटरनेट व सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित समाचार।
पत्रकार व लेखक जितेंद्र सोनी
एडिटर हर्ष सोनी
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