यूक्रेन रूस युद्ध समाचार : वर्ल्ड वॉर से पहले बन रहा है वर्ल्ड ऑर्डर इस वर्ल्ड ऑर्डर में कौन-कौन होगा शामिल कौन-कौन से देश एक दूसरे के खिलाफ होंगे रूस यूक्रेन युद्ध में कौन किसका साथ देगा




यूक्रेन रूस युद्ध समाचार : वर्ल्ड वॉर से पहले बन रहा है वर्ल्ड ऑर्डर इस वर्ल्ड ऑर्डर में कौन-कौन होगा पुतिन के साथ कौन-कौन से देश खड़े होंगे वह दुनिया का चौधरी बनने का सपना देख रहा अमेरिका अपने साथ किस किसको लाने में कामयाब हो सकता है आपको बताते हैं सबसे पहले रूसी राष्ट्रपति पुतिन को इस बात का भरोसा है कि हिंदी राष्ट्रपति जिनपिंग वर्ल्ड ऑर्डर में उनके साथ खड़े होंगे ओल्ड डॉटर बदल रहा है इस वर्ल्ड में कौन किस तरफ है रूस यूक्रेन युद्ध के बाद दुनिया वर्ल्ड वार की ओर बढ़ रही है दुनिया का वर्ल्ड वार मैं कौन किसके पीछे खड़ा होगा अमेरिका अपने आप को दुनिया का चौधरी साबित करने के लिए ब्रिटेन नाटो व अन्य यूरोपीय देशों को अपने साथ लाने के चक्कर में है 


क्या प्रधानमंत्री मोदी भी पुतिन का साथ देंगे

वही पुतिन इसको काउंटर करने के लिए पुतिन को यह लगता है की जिनपिंग उनका साथ निभाएंगे लेकिन क्या वाकई जिनपिंग वर्ल्ड ऑर्डर में अमेरिका के खिलाफ खड़े होंगे लेकिन सवाल फिर वही खड़ा हो रहा है कि क्या एक वर्ल्ड ऑर्डर में अमेरिका जापान ब्रिटेन फ्रांस और जर्मनी जैसे देश होंगे और क्या पुतिन के साथ जिनपिंग के अलावा क्या भारत देश भी पुतिन के इस वर्ल्ड ऑर्डर में पुतिन का साथ देगा क्या प्रधानमंत्री मोदी भी पुतिन का साथ देंगे क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वार्डन का साथ देंगे या पुतिन का इसी बात की कशमकश है 


दोनों तरफ और इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने साथ करने के लिए रूस के राष्ट्रपति ने अपने विदेश मंत्री को भारत की यात्रा पर भेजा है रूस के विदेश मंत्री पहले चाइना गए वहां से यह कल रात दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात कर उन्हें अपने साथ मिलाने की कोशिश करेंगे ! बात कर रहे हैं अमेरिका के बइडल की तो सुनने में आ रहा है कि जो बाइंडर पुतिन के डर से भाग गए और उन्होंने यूक्रेन को यही भरोसा दिलाया कि हम आपके साथ खड़े हैं

इसके अलावा उन्होंने किसी भी तरह की मदद नहीं भेजी अमेरिका ने यूक्रेन को यह साफ कर दिया है कि हम आपकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकते ! यह अमेरिका की एक कूटनीतिक चाल हो सकती है एक और वह जलेस्की की की पीठ थपथपाते हैं और दूसरी और वह रूसी राष्ट्रपति पुतिन के डर से अपने हत्यार यूक्रेन को देने से डर रहे हैं सिर्फ उन्हें मदद का भरोसा भी दिया जा रहा है लेकिन अगर युद्ध जीतना चाहते हैं तो उन्हें यूक्रेन को एयरफोर्स की पावर मोह्या करानी होगी क्योंकि किसी भी देश की युद्ध की स्थिति को पलटने के लिए उस देश की एयर फोर्स का सक्षम होना बहुत जरूरी है लेकिन आपको बता दें कि यूक्रेन के राष्ट्रपति जलेस्की पहले दिन से ही हवाई सुरक्षा की मांग कर रहे हैं 


प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का साथ दोनों वर्ल्ड ऑर्डर के देश चाहते हैं

वह पहले दिल से कह रहे हैं कि हमें हवाई सुरक्षा दीजिए हमारा एयर स्पेस बंद कीजिए उन्होंने नाटो से भी हवाई सुरक्षा की मांग की उन्होंने अमेरिका से भी अपने लिए एयर फोर्स तैनात करने की मांग की लेकिन अभी तक इस पर किसी भी तरह की कार्यवाही नहीं की गई लेकिन किसी भी देश के लड़ाकू विमान अभी तक यूक्रेन की सीमा में या यूक्रेन की धरती में लैंड होते नजर नहीं आ रहे उन्हें सिर्फ भरोसा भी दिलाया जा रहा है कि हम आपकी मदद करेंगे अब आपको बताते हैं कि वर्ल्ड वॉर से पहले बनने वाली वर्ल्ड ऑर्डर की टीमें कैसी होंगी और साथ में आपको बताते हैं कि इस इस लड़ाई में पुतिन का अगला प्लान क्या होगा पहले वर्ल्ड ऑर्डर में आपको बताते हैं पहले वर्ल्ड ऑर्डर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बायडन दूसरे हैं जॉनसन और साथ है अर्थोगन इसमें एमैनुएल माइक्रो है एक वर्ल्ड ऑर्डर है 


वर्ल्ड ऑर्डर में राष्ट्रपति पुतिन है और साथ होंगे चाइना के राष्ट्रपति जिनपिंग 


अब बात करते हैं पुतिन के ऑर्डर की इस वर्ल्ड ऑर्डर में राष्ट्रपति पुतिन है और साथ होंगे चाइना के राष्ट्रपति जिनपिंग लेकिन हम आपको पहले बता दें कि पुतिन ने अपने विदेश मंत्री को इस वर्ल्ड ऑर्डर की तैयारी के लिए चाइना भेजा है और वह चाइना से भारत के दौरे पर भी जाएंगे आपको बता दें कि यूक्रेन के  ऊपर सौंपा गया युद्ध  एक राजनीतिक पैंतरा ही हो सकता है क्योंकि अमेरिका को दुनिया का चौधरी बनना है और पुतिन उसे  दुनिया पर राज करने देना नहीं चाहता हो सकता है

यूक्रेन युद्ध की शुरुआत इसी बात को लेकर की गई हो कि किसी भी तरह इस युद्ध को वर्ल्ड वॉर का रूप देकर अमेरिका के साथ दो दो हाथ करना चाहता है उसे उसकी औकात दिखाना चाहता है यह सारा मामला यह सारा खेल  चौधराहाट के लिए ही खेला गया है आपको बता दें कि वर्ल्ड वॉर शुरू होने से पहले एक वर्ल्ड ऑर्डर बन रहा है और वर्ल्ड ऑर्डर में एक तरफ अमरीका और उसके साथ ब्रिटेन फ्रांस व ऑस्ट्रेलिया नॉर्वे पोलैंड जापान अन्य यूरोपियन देशों के साथ नाटो भी शामिल है वहीं दूसरी और इसके काउंटर में पुतिन ने भी एक अलग वर्ल्डऑर्डर बनाने की तैयारी कर रखी है

जिसमें टीम के साथ चाइना साथ में  उत्तर कोरिया वह बेलारूस यह अपने साथ भारत को मिलाने के लिए प्रयास कर रहे हैं अब देखना यह होगा कि भारत देश अमेरिका के साथ जाता है यहां पुतिन के साथ क्योंकि पुतिन के साथ भी भारत की दोस्ती पुरानी है इसका भी भारत को ध्यान रखना होगा वर्ल्ड वॉर से पहले यह वर्ल्डऑर्डर के कुछ देश लेकिन जिन देशों ने रूस के ऊपर बैन लगाया था वह देश तो उसके साथ कभी खड़े नहीं होंगे इस बीच रस्साकशी हो रही है की भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसके साथ होंगे आपको बता दें कि भारत के दौरे पर पुतिन के विदेश मंत्री नार्व पहुंच गए हैं वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर उन्हें अपने साथ होने के लिए कहेंगे वह वर्ल्डऑर्डर में प्रधानमंत्री मोदी को अपने साथ लेना चाहते हैं और दूसरी ओर अमेरिका का वर्ल्ड ऑर्डर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने साथ  चाहता है

दोनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने साथ देना चाहते हैं यह इसलिए संभव हो सका पिछले 8 सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत देश को इस मुकाम पर पहुंचाया कि आज हर देश में अपने साथ रखना चाहता है या यूं कहें कि भारत का साथ चाहता है इसी कारण यह वर्ल्ड ऑर्डर भी भारत को अपने साथ लेन के लिए हर संभव कोशिश कर रहा है क्योंकि ब्रिटेन के मंत्री यहां भारत के साथ वार्ता कर उसे अपने साथ करने के लिए कोशिश कर रहे हैं वहीं अमेरिका ने अमेरिकी राष्ट्रपति के करीबी माने जाने वाले अमेरिका में अर्थ अर्थव्यवस्था के एनएसए दिलीप सिंह को भारत दौरे पर भेजा है माना जा रहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कूटनीतिक के तहत भारतीय मूल के दिलीप सिंह को भारतीय सरकार को अपने साथ लाने के लिए दलीप सिंह को भेजा है इससे यह साफ है कि अमेरिका भारत का साथ चाहता  है प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का साथ दोनों वर्ल्ड ऑर्डर के देश चाहते हैं


इंटरनेट व समाचार पत्रों से मिली जानकारी पर आधारित खबर

पत्रकार जितेंद्र सोनी राजस्थान


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