उत्तराखंड समाचार : उत्तराखंड के पहाड़ जंगल और नदियां जो पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है , भू और खनन माफियाओं की भेंट चढ़ी हमारी विरासत क्या कोई इसे बचा सकता है / हालात बद से बदतर हैं अगर अभी कुछ ना किया तो हम अपनी यह विरासत खो देंगे






उत्तराखंड समाचार : उत्तराखंड में पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र दो ही चीजें है एक उत्तराखंड का वातावरण पहाड़ नदियां और दूसरा सबसे महत्वपूर्ण जो पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है वह है जंगल जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क और अन्य नेशनल पार्क उत्तराखंड में आते हैं


यह तमाम चीजें देश और विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है पर्यटक यहां मौसम का लुत्फ लेने आते हैं नैनीताल में नैनी झील का लुत्फ लेते हैं बोटिंग करते हैं वह जंगल सफारी करते हैं जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क के मुख्यता चार गेट है जहां ऑनलाइन सफारी बुक कर पर्यटक जंगल  वह जंगली जानवरों का दीदार कर सकते हैं कुल मिलाकर उत्तराखंड में पर्यटन का मुख्य आकर्षण यही चीजें है



लेकिन आने वाले समय में यह चीजें आकर्षण का केंद्र रहेंगी या नहीं यह तो समय ही बताएगा क्योंकि उत्तराखंड में एक तरफ जहां खनन माफिया सक्रिय है वहीं दूसरी ओर जंगल के आस-पास के गांव में कृषि भूमि पर हो रहे भू माफियाओं के अतिक्रमण से बनने वाली आवासीय कॉलोनियां भी जंगल के वातावरण को किसी ना किसी रूप में नुकसान पहुंचा रहे हैं 


बढ़ते कंक्रीट के जंगल,हमारी विरासत को दर्शाते इन हरे भरे जंगलों को कम कर रहे हैं


भू माफिया इतना सक्रिय हो चुका है कि जंगल के साथ लगते गांव में गांव वालों की कृषि भूमि को ओने पौने दामों में खरीद कर उसे कन्वर्ट करवा कर उसमें रिहायशी कॉलोनियां काट रहे हैं जोकि 100 में से 10 परसेंट कॉलोनी ही सरकार से परमिशन लेकर या यूं कहें कि उन कॉलोनियों को मान्यता दिलवा कर बनाई गई है 



बाकी बची 90 परसेंट कॉलोनियां कृषि भूमि में प्लॉटिंग कर उसे बेच दिया जाता है जिसे बाद में उस प्लॉट को खरीदने वाला अपने तरीके से उसमें घर बना कर रहने लगता है जिससे जंगल के आसपास में लोगों की आबादी बढ़ रही है यही एक कारण भी है कि जंगली जानवर आए दिन इंसानों पर हमला करते हैं क्योंकि इंसान उनके घर के अंदर दखलअंदाजी करने से बाज नहीं आ रहा सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए क्योंकि इंसान जानवरों के घर जंगल में अगर अपने घर बनाकर रहेगा तो जंगल के जानवर कहां जाएंगे और इस तरह बढ़ते कंक्रीट के जंगल,हमारी विरासत को दर्शाते इन हरे भरे जंगलों को कम कर रहे हैं जिससे मौसम में भी बदलाव देखने को मिल रहा है

रही सही कसर अवैध खनन करने वाले पूरी कर देते हैं क्योंकि नदियों में हो रहा अवैध खनन भी नदियों में बाढ़ लाने का एक बहुत बड़ा रोल अदा करता है नदियों को पाटकर उनका आकार छोटा बड़ा कर दिया जाता है चंद रुपयों के लालच में पर्यावरण से यह खिलवाड़ इंसान को किसी ना किसी रूप में महंगा पड़ रहा है लेकिन इंसान इसे समझ नहीं रहा और अपने लालच में आकर इसी और ज्यादा बढ़ावा दिया जा रहा है जंगल के आसपास में बने गांव में इस तरह से बनने वाली कॉलोनियों पर सरकार को तुरंत रोक लगानी चाहिए 


होटल और रिसॉर्ट वाले उनसे अच्छा खासा चार्ज भी वसूलते हैं 


ताकि जंगल का वातावरण सुरक्षित रहे जंगली जानवर सुरक्षित रहे पेड़ पौधे सुरक्षित रहे क्योंकि जंगल के आसपास बनने वाली कॉलोनियों में जंगल के ही पेड़ों को चोरी-छिपे काटकर काम में लिया जाता है वह जंगल में नदियों से खनन कर उसे निर्माण कार्य में इस्तेमाल किया जाता है जो कि सरकार को दोहरा नुकसान पहुंचा रहा है एक तरफ तो सरकार को राजस्व का नुकसान दूसरी तरफ जंगल में नदियों के कारण पर्यावरण का नुकसान बढ़ता ही जा रहा है 


जरूरत से ज्यादा बड़े होटल में रिसोर्ट भी इस नुकसान को बढ़ाने में अपना रोल अदा कर रहे हैं कहीं-कहीं तो यह होटल रिसोर्ट इतने बन गए हैं कि अब उन गांव में जगह भी नहीं बची इसी कारण संबंधित अधिकारियों से मिलीभगत कर जंगल की भूमि पर कब्जा कर लिया जाता है वह उस पर इमारत का निर्माण कर लिया जाता है जिससे जंगल के बिल्कुल साथ लगते इलाकों में पर्यटक इस लालच में होटल यह रिसोर्ट में आते हैं कि जंगल के व्यू का नजारा लेंगे और जंगली जानवरों भी देखने को मिलेंगे इस सुविधा के लिए होटल और रिसॉर्ट वाले उनसे अच्छा खासा चार्ज भी वसूलते हैं 



इन तमाम चीजों के पीछे एक लालची है जो हमारी धरोहर को नुकसान पहुंचा रहा है आने वाले समय में अगर यही हाल रहा तो वह दिन दूर नहीं जब जंगल के अंदर भी होटल रिसोर्ट बन जाए जो कि कहीं-कहीं बन भी गए हैं जंगल में जंगल के आस-पास के गांव में जितनी भी कृषि भूमि है उसे उस भूमि के मालिक बाहर के बिल्डरों को ऊंचे दामों पर बेच देते हैं बिल्डर उसे खरीद कर उसमें यहां तो महंगे प्लॉट काट देता है या उसमें होटल या रिसोर्ट बना दिया जाता है 



दोनों ही तरह से जंगल और पर्यावरण का नुकसान होना तय है सरकार को कृषि भूमि कन्वर्जन कानून सकता इसे लागू करना चाहिए ताकि किसी भी तरह की कृषि भूमि पर कन्वर्जन ना हो सके 143 ना हो सके जिससे वहां बनने वाली अवैध कॉलोनियों व होटल रिसोर्ट ना बन सके क्योंकि देखा देखी इतने रिसोर्ट होटल बन चुके हैं कि अब उन होटलों में ग्राहकों की कमी होने लगी है दिल्ली और बड़े शहरों के कई धन्ना सेठ होने जिम कॉर्बेट की में जमीन खरीद कर छोड़ रखी है ताकि उसमें होटल या रिसोर्ट बनाकर उससे मोटा मुनाफा कमाया जा सके 


लेकिन इस पूरे खेल में नुकसान पर्यावरण का होगा जंगल के जीवन पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा इसके साथ-साथ सरकार को राजस्व में म  नुकसान होना तो तय है अगर सरकार इनके ऊपर कड़े कदम नहीं उठाती तो जो पर्यटक जंगल देखने के लिए आते हैं जंगल के जानवरों का दीदार करने के लिए आते हैं उन्हें वह जंगल कंक्रीट की बिल्डिंग में बदले हुए नजर आए वह दिन दूर नहीं


अभी कुछ दिन पहले माननीय उच्च न्यायालय ने भी अवैध खनन को रोकने के लिए सरकार को सख्त आदेश दिए थे  ड्रोन से उसकी निगरानी करने के लिए भी माननीय उच्च न्यायालय ने सरकार को कहा लेकिन अवैध खनन के साथ साथ कृषि भूमि पर बनने वाले रिसोर्ट में आवासीय कॉलोनियों को भी पूर्णतया बंद करना और कन्वर्जन को रोकना भी इस काम के लिए जरूरी है जंगल के आसपास जब कृषि भूमि पर किसी बड़ी इमारत का निर्माण कार्य होता है तो उसके लिए लगने वाले मटेरियल की जरूरत को पूरा करने के लिए वहां आसपास  की  नदी या पहाड़ में अवैध खनन कर पत्थर व अन्य बिल्डिंग मटेरियल खनन माफिया उपलब्ध करवाते हैं 


जिससे कि पर्यावरण को सीधे तौर पर नुकसान होता है पेड़ों की कटाई बी चोरी-छिपे की जाती है जोकि एक बहुत बड़ा जांच का विषय है कि रातों-रात बड़े-बड़े पेड़ काटकर गायब कर दिए जाते हैं जिसे बाद में जंगल के आसपास बनने वाले व्यवसायिक इमारत या कॉलोनी में इस्तेमाल किया जाता है इस तरह से पर्यावरण जंगल व नदियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है जो कि आने वाले समय में किसी ना किसी रूप में हम लोगों के लिए भी नुकसानद होगा आने वाले समय में जंगल और पहाड़ अपनी खूबसूरती खो देंगे उनकी जगह ऊंची इमारतें खड़ी होकर जंगलों का मुंह चिढ़ाएंगी और जंगली जानवर परेशान होकर इंसानों पर हमले तेज करेंगे जंगल के आसपास इंसानी बस्तियों से ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ रही है 


जिससे कि वन संपदा का नुकसान वह जंगली जानवरों की मौत भी हो जाती है यह आग कई सैकड़ों हेक्टर जंगल को जलाकर खाक कर देती है जिससे उठने वाला धुआ भी पर्यावरण के अंदर मिलकर नुकसान पहुंचाता है सरकार को इसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है व पहले से बने कानूनों को और ज्यादा सख्ति इसे लागू करने की भी जरूरत है माननीय हाईकोर्ट के आदेश अनुसार अवैध खनन की ड्रोन से निगरानी के आदेश को भी जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए साथ ही कृषि भूमि पर किसी भी तरह की व्यवसायिक गतिविधि पर रोक लगनी चाहिए 



खास तौर पर जंगल के आस-पास के गांव में किसी भी बड़ी इमारत या व्यवसाय कॉलोनी नहीं बननी चाहिए क्योंकि यह आगे चलकर जंगल के वातावरण के लिए घातक साबित होंगी हमें इस धरोहर को बचाना होगा यह जंगल यह पहाड़ यह नदियां यह हमें जीवन देती है हमारे पर्यावरण को बनाए रखने में इनका सबसे बड़ा रोल होता है अगर यही नहीं होंगे तो जनजीवन पर इसका प्रतिकूल असर होगा साथ ही उत्तराखंड के पर्यटन विभाग को भी इस ओर ध्यान देना चाहिए की पर्यटकों के उत्तराखंड आने से लेकर वापिस जाने तक उन्हें सुविधाएं देने वाले होटलों की संख्या वह पर्यटकों के आने की संख्या के अनुसार नए  होटलो की जरूरत है या नहीं जितने होटल बन चुके हैं क्या वह पर्यटकों के हिसाब से कम है और साथ ही ऐसे एरिया में किसी भी तरह के होटल रिसोर्ट या आवासीय कॉलोनी को बनने नहीं देना चाहिए जो कि जंगल के करीब हो या जिससे जंगल के जीवन पर सीधे रूप असर पड़ता हो आज हम अगर कुछ कड़े कदम उठाएंगे तो आने वाले पीढ़ी को यह जंगल यह नदियां देखने को मिलेगी 


अन्यथा यह भू माफिया यह खनन माफिया हमारी इस धरोहर को धीरे धीरे बेचकर खत्म कर देंगे लेकिन उनका पेट नहीं भरेगा जंगल धीरे-धीरे सीमेंट रहे हैं नदियां धीरे-धीरे कट रही है इन्हें वापिस इनकी उसी सूरत में लाना होगा जंगलों को कटने से बचाना है तो जंगलों के आसपास किसी भी तरह के पक्के निर्माण को यहां कृषि भूमि पर किसी भी तरह के निर्माण पर पूर्णतया रोक लगानी होगी यही एक रास्ता है कि हम पर्यावरण जंगल और नदियों को उनके वास्तविक रूप में रख सके



पर्यावरण बचाओ उत्तराखंड बचाओ

जनहित में प्रकाशित समाचार


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