भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच कोरोना महामारी को लेकर के जलवायु संकट को लेकर के वह अन्य संवेदनशील मुद्दों के ऊपर भी गहन चर्चा हो सकती है

आज भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी अमेरिका के राष्ट्रपति के साथ एक वर्चुअल मीटिंग करने जा रहे हैं जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति रूस को लेकर भारत के रुख पर चर्चा कर सकते हैं यूक्रेन और रूस के बीच हो रही जंग को लेकर अमेरिका सख्त रवैया अपनाए रहा है रूस पर अमेरिका ने कई बड़े प्रतिबंध भी लगाए हैं इसके अलावा अमेरिका के साथ ही देश को कई यूरोपियन देशों में भी रूस के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते तोड़ लिए हैं या यूं कहें कि उन्होंने भी रूस प्रतिबंध लगाए हैं
अब अमेरिकी राष्ट्रपति इस मामले पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करने के लिए आज एक वर्चुअल बैठक करने जा रहे हैं इस बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति जो गार्डन भारत के प्रधानमंत्री श्री मोदी से भारत के रुख पर बातचीत कर सकते हैं इसी बीच सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रूस और यूक्रेन युद्ध पर भी बात हो सकती है इस वर्चुअल बैठक को लेकर यूं तो कई और अन्य मुद्दे बताए गए जिन्हें लेकर दोनों देशों के अध्यक्षों के बीच वार्ता होनी है लेकिन विशेषज्ञों की बात करें तो उनका कहना है
अमेरिकी राष्ट्रपति भारत के साथ रूस का जिक्र जरूर करेंगे साथ ही इस मुलाकात के दौरान वह भारत पर रूस को लेकर दबाव बनाने की कोशिश कर सकते हैं ऑफिशल स्टोर पर जानकारी निकल कर आ रही है कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच कोरोना महामारी को लेकर के जलवायु संकट को लेकर के वह अन्य संवेदनशील मुद्दों के ऊपर भी गहन चर्चा हो सकती है
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जो गार्डन के बीच आज रात होने जा रही इस वर्चुअल बैठक के ठीक बाद भारत और अमेरिका के एक मीटिंग होगी इसके लिए भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर पहले ही अमरीका चुके हैं अमेरिकी राष्ट्रपति राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका और भारत के बीच टू प्लस टू मंत्रियों की मीटिंग होने जा रही है
इस मीटिंग में रक्षा मुद्दों समेत कई और मुद्दों पर भी सहमति हो सकती है इसी पर चर्चा होगी भारत के उस पर नरम रवैया को लेकर या यूं कहें कि दोस्ताना रवैया को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति जो गार्डन थोड़ी नाराज लग रहे हैं रूस और यूक्रेन युद्ध के बाद जिस तरह से हिंदुस्तान न्यूट्रल रहा भारत में कहीं भी यूस की खुलकर आलोचना या खिलाफत नहीं की किसी भी सार्वजनिक मंच पर उसके खिलाफ बात नहीं की जब नाटो देश द्वारा रूस के खिलाफ वोटिंग करने के लिए कहा गया तो अभी भारत ने इससे हिस्सा नहीं लिया भारत ने अपने बयान में बस दोनों देशों को युद्ध विराम करना चाहिए यही कहा और मानवाधिकार के हनन को लेकर चिंता जताई
वहीं अमेरिका की तरफ से तमाम बड़े देशों को रूस के खिलाफ आवाज उठाने की सलाह दी जा रही थी अमेरिका के साथ रिश्तो पर इस बात का असर पड़ा कि भारत ने रूस के खिलाफ लुक अलग रखा प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच मुद्दे पर चर्चा होना लाजमी है

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