ताजा समाचार : हरी सब्जियों के साथ मिलने वाले फ्री धनिए ने अपना असली रूप दिखाया फ्रूट से महंगा मिलने लगा धनिया वह हरी मिर्च , सब्जियों के भाव पकड़ में नहीं आ रहे




ताजा समाचार : रूस और यूक्रेन में चल रहे युद्ध के कारण डीजल पेट्रोल की कीमतें बढ़ने और कुछ बिगड़े मौसम के कारण  नींबू व अन्य सब्जियों की फसल के खराब होने के चलते हरी सब्जियों के दामों में भारी इजाफा हुआ है हरी सब्जियां गरीब परिवार की पहुंच से दूर होती नजर आ रही हैं इनके दाम आसमान छूने लगे हैं चाहे वह बाहर से आयात की जाने वाली चीजें या घरेलू उत्पाद वाली चीजें सबका हाल एक जैसा है सब्जियों की बात करें तो फ्री में मिलने वाले धनिया और हरी मिर्च से लेकर नींबू तोरई शिमला मिर्च सब पहुंच से परे होते जा रहे हैं


फलों की बात करें तो फलों के भाव पूछने से ही जुबान का टेस्ट खराब हो जाता है हाल ही में नींबू के भाव ₹400 प्रति किलो तक पहुंच गए हैं इसके साथ सब्जियां भी 100 से ₹200 किलो के दायरे में पहुंच गई हैंपिछले एक महीने की बात की जाए तो जहां मार्च की शुरुआत में नींबू करीब 70 रुपये प्रति किलो के भाव पर मिल रहा था, वहीं अब यह कीमतें कई जगहों पर 400 रुपये तक पहुंच गई हैं। हालांकि, अलग-अलग मंडियों में दूरी के हिसाब से नींबू की कीमतें अलग-अलग हैं। मौजूदा समय में सबसे सस्ता नींबू 250 रुपये प्रति किलो के हिसाब से लखनऊ की मंडी में मिल रहा है।


उधर नींबू की सबसे ज्यादा कीमत दिल्ली और जयपुर में हैं, जहां सब्जी मंडियों में यह 350 से 400 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है। मौसम की मार मिर्च के दामों पर भी पड़ी है। जहां मार्च के मध्य तक मिर्च की कीमतें 40 रुपये प्रति किलो थी, वहीं अप्रैल की शुरुआत में यह दुकानों में 120 रुपये प्रति किलो के भाव पर आ गई है। यानी एक महीने के अंदर मिर्च के दाम भी तीन गुना बढ़े हैं। धनिया की कीमत में भी काफी इजाफा हुआ है। मार्च में धनिया की 40 रुपये प्रति किलो के करीब बिक रहा था।

अब मंडियों में यह 150-200 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। यानी चार से पांच गुना की बढ़ोतरी।दिल्ली की सबसे बड़ी मंडी आजादपुर में भी बीते 5 दिनों में ₹80 किलो तक नींबू के दामों में बढ़ोतरी देखने को मिली सब्जी मंडी के व्यापारियों ने इसका एक कारण पिछले साल गुजरात में आया तूफान जिसके कारण नींबू के  पौधे खराब हो गए और किसानों को नुकसान पहुंचा इसके अलावा दो राज्य जहां नींबू की खेती होती है तेलंगाना आंध्र प्रदेश वहां भी चक्रवर्ती तूफान के कारण नींबू की फसल को  हानी  पहुंची और नींबू के पेड़ भी खराब हो गए थे



पिछले 2 साल से नींबू की कीमतों में कोई ज्यादा उछाल नहीं आने के कारण  इस सीजन में नींबू की खेती करने वाले किसानों ने नींबू की खेती में रुचि कम दिखाई यही कारण है कि इस बार नींबू की फसल कम हुई है और मांग ज्यादा जिसके कारण भाव बढ़ रहे हैं । इस समय रोजाना 25 से 30 गाड़ियां ही बीजापुर, गुंटूर, हैदराबाद, विजयवाड़ा से नींबू लेकर निकलती हैं। पिछले साल इस सीजन में इस समय रोजाना 150 गाड़ियों के करीब निकलती थीं।डीजल के दाम बढ़ने से माल भाड़े में हुई बढ़ोतरी भी सब्जियों को महंगा करने का एक कारण हो सकती है । फिलहाल ढुलाई की कीमतों में करीब 15 फीसदी तक के इजाफे की बात कही जा रही है। इसका असर न सिर्फ नींबू के दामों में देखा जा रहा है, बल्कि कई और मौसमी सब्जियां भी लगातार महंगी हो रही हैं। 

इसके अलावा भारत मेंनवरात्रि का पर्व और रमजान कुछ अन्य त्योहारों के कारण से नींबू की  मांग में भी बढ़ोतरी हुई है।  और इसकी कम आवक और नींबू खरीद के लिए मची इस मारामारी ने नींबू का दाम बढ़ा दिए हैं । दूसरी तरफ  सॉफ्ट ड्रिंक से जुड़े उद्योगों ने गर्मी का सीजन आते ही नींबू उत्पादकों को बड़े ऑर्डर देना शुरू कर दिए ताकि लेमन ड्रिंक्स बनाने में नींबूओं का इस्तेमाल किया जा सके। आवाज कम है ऑल डिमांड ज्यादा  जिसके चलते नींबू के भाव सातवें आसमान पर हैं 


हरी सब्जियों के दाम मौसम की मार से भी बढ़े

गर्मी का इस साल मार्च से ही  अपना रूप दिखाने लगी है। इसका असर हरी सब्जियों के ऊपर भी पड़ा  हरी सब्जियों भी  लगातार ऊंचे दामों पर बिक रही हैं। सब्जी की फसलों पर  ज्यादा गर्मी के कारण ज्यादा पानी  देना पड़ता है और   सब्जी की खेती के खर्चे में हुई बढ़ोतरी के कारण से भिंडी  शिमला मिर्च से लेकर तुरई, के भाव भी सौ रुपये प्रति किलो तक  हो गए हैं।  सब से सस्ता  बिकने वाला परवल भी 80 रुपये किलो है। 

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