दिल्ली समाचार : शाहीन बाग में अतिक्रमण हटाने के पहुंचे बुलडोजरों को खाली हाथ लौटना पड़ा ,भारत के अंदर शाहीन बाग में लागू नहीं होता संविधान

दिल्ली नगर निगम के बुलडोजर आज शाहीन बाग में अतिक्रमण हटाने के लिए दिल्ली पुलिस की सुरक्षा लेकर पहुंचे लेकिन वहां रहने वाले एक खास धर्म के लोगों ने इस कार्रवाई को पूरा नहीं होने दिया बल्कि इसे धार्मिक रंग दे दिया और विपक्ष के नेताओं और स्थानीय लोगों ने इस पूरी कार्रवाई को मुसलमानों पर अतिक्रमण का मामला बना दिया शायद देश में ऐसा पहली बार हुआ है जब बुलडोजरों को किसी इलाके से खाली हाथ लौटना पड़ा ये एक बहुत चिंताजनक खबर है क्योंकि आप जिस भी शहर में रहते हों वहां पर भी शाहीन बाग जैसा कोई ना कोई इलाका ऐसा जरूर होगा, जहां पुलिस भी नहीं जा सकती और अब देश में ऐसे इलाकों की संख्या तेजी से बढ़ती जा रही है

बुलडोजर के साथ शाहीन बाग में आज दिल्ली नगर निगम के अधिकारी अवैध निर्माण को हटाने के लिए पहुंचे थे लेकिन तीन घंटे की कोशिश के बाद भी नगर निगम के बड़े बड़े अधिकारी भारी पुलिसबल होते हुए भी अतिक्रमण को हटा नहीं सके सोचिए सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले लोगों ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस को उनका काम करने से ही रोक दिया और नगर निगम को बिना कार्रवाई किए ही बुलडोजर वहां से हटाने पड़े ये इस तरह का शायद पहला मामला होगा जब भारत का संविधान और भारत का कानून एक इलाके के लोगों के सामने बेबस हो गया

101 दिन बंद रही शाहीन बाग में सड़क

जब 2019 में नागरिकता संशोधन कानून आया था उस समय भी शाहीन बाग में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे और 101 दिनों तक एक खास समुदाय के लोगों ने शाहीन बाग की सड़कों को बन्द कर दिया था उस समय भी हमारे देश की संवैधानिक व्यवस्था और कानून इन सड़कों को खुलवा नहीं पाए थे और आज भी ठीक वैसा ही हुआ इस इलाके में लोगों ने फुटपाथ पर काफी समय से अतिक्रमण किया हुआ था अवैध कब्जे को हटाने के लिए उन्हें कई बार नोटिस भी दिए गए थे इसके अलावा आज की कार्रवाई को लेकर भी इलाके के लोगों को पहले से ही जानकारी दे दी गई थी लेकिन आरोप है कि बुलडोजर को रोकने के लिए वहां पहले सैकड़ों लोग इकट्ठा हो गए और इसके बाद इन लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया इन लोगों ने इस कार्रवाई को एक खास धर्म से जोड़ दिया और ये कहा कि जब अतिक्रमण कई वर्षों से है तो नगर निगम ये कार्रवाई आज ही क्यों कर रहा है यानी इन लोगों के कहने का मतलब ये था कि जब पिछले कई वर्षों से ये अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो ये कार्रवाई अब क्यों हो रही है

देश में हिन्दू या मुस्लिम इलाका कैसे

इस कार्रवाई के विरोध में एक महिला बुलडोजर पर चढ़ गई और उस महिला ने कहा कि प्रशासन मुस्लिम इलाकों पर बुलडोजर कैसे चला सकता है आज हम ये सवाल आप सबसे पूछ रहे हैं कि एक धर्म निरपेक्ष देश में कोई भी जगह हिन्दू इलाका या मुस्लिम इलाका कैसे हो सकती है क्योंकि ना तो हमारे संविधान में और ना ही हमारे सरकारी रिकार्डे में किसी स्थान को इस तरह से चिन्हित किया गया है लेकिन इसके बावजूद जब इस तरह की कार्रवाई होती है तो उसका ये कहते हुए विरोध किया जाता है कि ये मुस्लिम इलाके में कैसे हो सकता है

आज शाहीन बाग के इन लोगों ने देशभर में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने वाले और गैर कानूनी काम करने वाले लोगों के सामने एक नया फॉर्मूला पेश किया है कि वो कैसे पुलिस और कानून को अपने खिलाफ कार्रवाई करने से रोक सकते हैं ये काम ज्यादा मुश्किल नहीं है क्योंकि ऐसे मामलों में धर्म का फॉर्मूला काम करता है और आज अगर हमने इस धर्म या समुदाय का नाम ले लिया तो हमें जान से मारने की धमकियां मिलने लगेंगी और हो सकता है कि हमारे खिलाफ FIR भी हो जाए इसलिए हम यहां किसी का नाम नहीं लेंगे लेकिन जो सच है, वो भी हम आपसे नहीं छिपाएंगे

शाहीन बाग में कानून नहीं चलता 

आज दिल्ली का शाहीन बाग एक ऐसा इलाका बन चुका है, जहां आप कहीं भी मकान बना सकते हैं दुकान बना सकते हैं अतिक्रमण कर सकते हैं क्योंकि यहां अब सरकार की जमीन बची ही नहीं है यहां अब बस कुछ खास समुदाय के लोगों की जमीन रह गई है और यहां कानून भी इन्हीं का चलता है.शाहीन बाग में आज 500 मीटर से ज्यादा के इलाके में अवैध कब्जे पर बुलडोजर चलना था लेकिन इस इलाके में रहने वाले एक खास समुदाय के लोगों ने ये तय किया कि वो ना तो पुलिस को वहां प्रवेश करने देंगे और ना ही बुलडोजर को वहां आने देंगे इसलिए इन लोगों ने नगर निगम की टीम के पहुंचने से पहले ही फुटपाथ पर किए गए अतिक्रमण को हटा लिया और पुलिस से ये कहा कि अब जब कोई अतिक्रमण रहा ही नहीं तो वो इस इलाके में क्या करने आए हैं यानी ये लोग सरकारी अधिकारियों को वहां प्रवेश करने से भी रोक रहे थे

संविधान बुलडोजर से खतरे में आया 

बड़ी बात है कि जहांगीरपुर की घटना से अब तक दिल्ली में MCD 30 से ज्यादा जगहों पर अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर चला चुका है और इनमें से ज्यादातर कार्रवाई उन इलाकों में हुई है जहां हिन्दू रहते हैं लेकिन इसके बावजूद इन इलाकों में हुई कार्रवाई के खिलाफ ना तो कोई सुप्रीम कोर्ट गया और ना ही यहां बुलडोजर चलने से देश का संविधान खतरे में आया सोचिए ऐसा क्यों है कि देश का संविधान तभी खतरे में आता है तब अतिक्रमण एक खास धर्म के लोगों ने किया होता है

आज शाहीन बाग में बुलडोजर रुकवाने के लिए पहुंचे आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान के समर्थन में भी जबरदस्त नारेबाजी हुई. आरोप है कि अमानतुल्लाह खान के ही समर्थकों ने बुलडोजरों को शाहीन बाग के अन्दर प्रवेश नहीं करने दिया जिसके बाद MCD की तरफ से पुलिस में उनके खिलाफ शिकायत भी दर्ज कराई गई है लेकिन शाहीन बाग के लोग अमानतुल्लाह खान से काफी खुश हैं और पूरे इलाके में उनके नाम के नारे गूंज रहे हैं हमें लगता है कि ये एक खतरनाक ट्रेंड की शुरुआत है क्योंकि भविषय में इस तरह की कार्रवाई के दौरान जो नेता अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई रुकवा देगा वो तो चुनाव जीत जाएगा जो नेता ये कहेगा कि अतिक्रमण नहीं होना चाहिए और सड़क लोगों के चलने के लिए होनी चाहिए वो नेता हार जाएगा आज शाहीन बाग में बुलडोजर रुकवाने के लिए हमारे देश का लिबरल गैंग भी एक्टिव हो गया  इस मामले में आज लेफ्ट पार्टी CPM की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई जिसमें अदालत से ये कहा गया कि वो शाहीन बाग में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को रोकने का आदेश जारी करे

लिबरल गैंग और विपक्ष हुआ एक्टिव

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया और ये कहा कि अदालत को राजनीति का मंच नहीं बनाया जाना चाहिए अदालत ने ये भी कहा कि उसने जहांगीरपुरी मामले में दखल दिया था तो इसका ये मतलब नहीं है कि ऐसे हर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में की जाएगी इसके अलावा कांग्रेस ने भी आज शाहीन बाग में प्रदर्शन करके इस कार्रवाई का विरोध किया और विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले को अल्पसंख्यकों से जोड़ दिया है यानी शाहीन बाग को लेकर हमारे देश का लिबरल गैंग और विपक्षी नेता एक्टिव हो गए हैं

भारत के विभाजन की पहली नींव वर्ष 1940 में रखी गई थी. उस समय मुस्लिम लीग के लाहौर अधिवेश में मोहम्मद अली जिन्नाह ने पाकिस्तान नाम का अलग देश बनाने की पहली बार मांग की थी. यानी उन्होंने टू नेशन थ्योरी का विचार पहली बार इस मंच से रखा था इस अधिवेशन में जिन्ना ने जो भाषण दिया था आज मैं उसकी कॉपी अपने साथ लाया हूं

मोहम्मद अली जिन्ना की थ्योरी मानने वाले लोग

इसमें वो कहते हैं कि भारत के मुसलमान अल्पसंख्यक नहीं हैं बल्कि वो एक अलग राष्ट्र हैं इसलिए मुसलमानों को अलग देश और अलग सरकार मिलनी चाहिए अगर हिन्दू और मुसलमानों को मिला कर एक राष्ट्र बनाया जाता है तो ये राष्ट्र कभी कामयाब नहीं होगा और इस राष्ट्र में हमेशा अंसतोष और क्रोध बना रहेगा इसी भाषण में वो ये भी कहते हैं कि भारत के मुसलमान कोई भी ऐसा संविधान स्वीकार नहीं करेंगे जिससे बहुसंख्यक हिन्दुओं की सरकार स्थापित होती है अगर हिन्दू और मुसलमानों को एक प्रजातंत्र में रखा जाता है तो इसका एक ही अर्थ होगा अल्पसंख्यकों पर हिन्दू राज की स्थापना इसलिए मोहम्मद अली जिन्ना चाहते थे कि मुसलमानों का अलग देश हो उनकी अपनी अलग अर्थव्यवस्था हो अपना संविधान हो और अपने कानून हों आज हमारे देश में बहुत सारे लोग ऐसे हैं जो जिन्ना के समर्थक हैं लेकिन विभाजन के समय ये लोग भारत में ही रह गए थे. लेकिन अब ये भारत में रहते हुए जिन्ना की टू नेशन थ्योरी पर काम कर रहे हैं और धर्म के नाम पर भारत के कई टुकड़े कर देना चाहते हैं , ये शाहीन बाग में पहली बार नहीं हुआ है वर्ष 2020 में जब शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ आन्दोलन हुआ था उस समय भी इस इलाके की सड़के बन्द कर दी गई थीं और तब मैंने खुद यहां जाने की कोशिश की थी लेकिन मुझे भी ऐसा करने से रोक दिया गया था

आज अगर आपने इस खबर से कोई सीख नहीं ली तो आपकी आने वाली पीढ़ियों का सड़कों पर चलना मुश्किल हो जाएगा. सड़कों को भी धर्म के नाम पर बांट दिया जाएगा. हिन्दुओं के चलने के लिए अलग सड़क होगी. मुसलमानों के चलने के लिए अलग सड़क होगी. फिर इसी आधार पर देश के दूसरे संसाधानों को भी धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश की जाएगी. ट्रेनें, बसें, स्टेशन और दूसरी तमाम सुविधाएं और सेवाएं हिन्दू और मुसलमान के नाम पर बंट जाएगी. जैसे आज कई इलाके धर्म के हिसाब से बंट गए हैं. हो सकता है कि भविष्य में वहां नई सीमाएं खींच दी जाएं और आपको एक भारत के अन्दर ही कई भारत नजर आने लगें. इसलिए आज आपको ये समझना जरूरी है कि धर्मनिरपेक्ष देश में धर्म के नाम पर कुछ नहीं हो सकता.



Source Zee News Hindi


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