श्रीगंगानगर : राजाराम मोहनराय ने सभी धर्मों का गहन अध्ययन कर हिन्दू धर्म में व्याप्त कुरीतियां दूर करने का बीड़ा उठाया था। इसके लिए उन्होंने पुस्तकों के अध्ययन और पुस्तकालयों के विकास के लिए कार्य किया। यह बात जिला सार्वजनिक पुस्तकालय में ‘सार्वजनिक पुस्तकालय दिवस’ (पब्लिक लाईब्रेरी-डे) 22 मई की पूर्व संध्या पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि शिक्षाविद् डॉ. के.डी. लीला ने कही। डॉ. लीला ने कहा कि पुस्तकें मशाल की तरह काम करती हैं और पुस्तकें ही राय के मिशन में सहायक बनी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अपना घर आश्रम के महासचिव समाजसेवी जगीरचंद फरमा ने कहा कि कोई भी व्यक्ति अपनी तरक्की के लिए बिना पुस्तकों के आगे नहीं बढ़ सकता है। अत: विकास के लिए पुस्तकें बहुत जरूरी हैं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि सेवानिवृत्त व्याख्याता श्रीमती रष्पिन्द्र कौर ने पुस्तकालयों के महत्व के सन्दर्भ में अपने जीवन के अनुभव और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य स्वरूप सिंह जज ने विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए राजाराम मोहनराय के पुस्तकालयों के प्रति योगदान से विस्तारपूर्वक अवगत करवाया।
माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण पूजन से शुरू हुए इस कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए जिला पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. रामनारायण शर्मा ने बताया कि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा ‘राजाराम मोहनराय के जन्मदिवस (जयंती)’ को ‘सार्वजनिक पुस्तकालय दिवस’ (पब्लिक लाईब्रेरी-डे) के रूप में मनाने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. शर्मा ने राजाराम पुस्तकालय प्रतिष्ठान के सार्वजनिक पुस्तकालयों के विकास में योगदान पर विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम में वरिष्ठ एडवोकेट ओमप्रकाश स्वामी तथा सेवानिवृत्त प्रोफेसर बनवारीलाल शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में पुस्तकालय के प्रबुद्ध विद्यार्थी संजय और मोनू ने भी राजाराम मोहन राय के जीवन वृत्त पर संक्षिप्त प्रकाश डाला। मंचासीन अतिथियों को साहित्यिक पुस्तकें सम्मानस्वरूप भेंट की गई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता शिक्षाविद् समाजसेवी मनीराम सेतिया ने मंच संचालन करते हुए पुस्तक के महत्व पर तथा राजाराम मोहन राय के जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राजाराम मोहन राय ब्रह्म समाज के संस्थापक और जनजागरण तथा सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रणेता व भाषायी प्रेस के प्रवर्तक थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और पत्रकारिता के कुशल संयोग से दोनों क्षेत्रों को गति प्रदान की। राजाराम मोहनराय का जीवन दर्शन और सार्वजनिक पुस्तकालयों के प्रति उनके योगदान विषय पर केन्द्रित इस विचार गोष्ठी के सफल आयोजन पर जिला पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. रामनारायण शर्मा ने समस्त अतिथियों, आगंतुकों, पुस्तकालय स्टाफ तथा पाठकों का आभार व्यक्त किया। इस कार्यक्रम में पुस्तकालय के प्रबुद्ध पाठक, गण्यमान्य नागरिक और कैरियर निर्माण में लगे अनेक छात्र/छात्राएं उपस्थित थे। कार्यक्रम के अंत में जलपान का आयोजन भी किया गया था।





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