राजस्थान समाचार : श्रीगंगानगर - गणेश ऑयल मिल की औद्योगिक भूमि को फर्जी रिपोर्ट की आड़ में साजिश के तहत खातेदारी दर्ज करने का गैर कानूनी आदेश और डिक्री पारित करने के जुर्म में एसडीएम सहित अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज

भारतीय भागीदारी अधिनियम 1932 के तहत पंजीकृत भागीदारी फर्म गणेश आयल एण्ड जनरल मिल्स की शिव चौक पर स्थित करोड़ों रूपये मूल्य की 8 बीघा 9 विस्वा औद्योगिक भूमि को सुनियोजित साजिश के तहत विधि के प्रतिकूल कृषि भूमि के रूप में दर्ज करने की डिक्री पारित करने के जुर्म में के अदालत के आदेश पर कोतवाली थाने ने नामजद आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।


परिवादी श्रीकृष्ण कुक्कड़ एडवोकेट द्वारा अदालत के जरिए दर्ज कराए मुकदमे में आरोप लगाया कि फर्म गणेश ऑयल एण्ड जनरल मिल ने चक 3 ई छोटी के मुरब्बा नम्बर 36 के किला नम्बर 6 से 8, 11 से 15 और चक 6 ई छोटी के मुरब्बा नम्बर 1 की किला नम्बर 10,11 और 20 की कुल 8 बीघा 9 बिस्वा कृषि भूमि पर 1975 में 20000 फुट शेड बनाकर बैंक में मिल की सम्पति गिरवी रखकर लोन लेकर ऑयल एण्ड जनरल मिल लगाई। फर्म ने कृषि भूमि को औद्योगिक भूमि में परिवर्तन करने के लिए जिला कलक्टर के समक्ष आवेदन पत्र पेश करने पर 25 लाख 49 हजार 325 रूपये नियमन शुल्क की मांग की।


नियमन शुल्क की राशि जमा न कराने पर कलैक्टर ने तहसीलदार को फर्म की अचल सम्पति कुर्क करने का आदेश दिया। नियमन शुल्क की राशि जमा कराने से बचने के लिए फर्म के भागीदार तेजेन्द्र सिंह ने एडीएम सिटी के समक्ष रिसीवर नियुक्त करने के लिए आवेदन पत्र पेश किया। एडीएम सिटी ने एसएचओ जवाहरनगर को रिसीवर नियुक्त करने का आदेश दिए जाने पर एसएचओ फर्म की सम्पति अपने कब्जे में ले ली।

फर्म के कथित भागीदारों द्वारा राजीनामा करने पर 2021 में फर्म की औद्योगिक भूमि रिसीवर मुक्त हुई। 05 फरवरी 2021 को फर्म ने तहसीलदार के जरिए सरकार को 25 लाख 49 हजार 235 रूपये नियमन शुल्क जमा करवाया।


डीएलसी रेट के अनुसार शिव चौक पर बीच बाजार सूरतगढ- हनुमानगढ रोड पर फर्म की उक्त औद्योगिक भूमि की कीमत करीब 86 करोड और बाजार रेट के अनुसार करीब 200 करोड़ रूपये मूल्य की भूमि को साजिश के तहत 8 करोड़ रूपये में बेचने की फर्म के कथित भागीदारों ने सुनियोजित साजिश रची  


इस साजिस के तहत फर्म के भागीदारों ने खुद को फर्म की भूमि का मालिक जाहिर करते हुए सोहम शाह फिल्म डेेवलेपर्स को 08 करोड़ रूपये में बेचने का सौदा किया। फर्म की औद्योगिक भूमि पर 20000 फुट में 1975 में शेड बनाया गया। फर्म के भागीदारों और क्रेता सोहम शाह द्वारा उप पंजीयक के समक्ष पेश सेल डीड में जानबूझकर फर्म की ओद्योगिक भूमि होने के सही व सारवान तथ्य को छिपा कर कृषि भूमि होने की मिथ्या तात्विक प्रविष्टि करके कूटरचित विक्रय विलेख तैयार करवाकर छल के प्रयोजन से कूटरचित विक्रय विलेख को असली के रूप में इस्तेमाल करके पंजीयन के लिए उप पंजीयक संजय अग्रवाल के समक्ष पेश किया।


सेल डीड के साथ फर्म के भागीदार रामभज ने घोषणा पत्र पेश किया जिसमें फर्म की भूमि को औद्योगिक भूमि होने और 1975 में 20000 हजार फुट में शेड बनाने का दावा किया।

उप पंजीयक संजय अग्रवाल ने यह जानते हुए कि फर्म की उक्त भूमि औद्योगिक भूमि है और कृषि भूमि नहीं है। जिसकी डीएलसी रेट के मुताबिक करीब 86 करोड़ रूपये मूल्य है। फर्म के भागीदार फर्म की भूमि के मालिक नहीं है बल्कि एजेंट है इसलिए बतौर मालिक फर्म की भूमि बेचने के अधिकारी नहीं है । उनके द्वारा बतौर मालिक फर्म की औद्योगिक भूमि को कृषि भूमि के रूप में निष्पादित सेल डीड कूटरचित और फर्जी है लेकिन उन्होंने राजकोष को राजस्व हानि कारित करने और सोहम शाह फिल्म डेवलेपर्स के निदेशकों को करोड़ो रूपये का गैरकानूनी तौर पर फायदा पहुंचाने की नियत से रची साजिश के तहत अपने पद का भ्रष्टतापूर्वक दुरूपयोग करते हुए केवल 8 करोड़ रूपये में कूटरचित सेल डीड का पंजीयन कर दिया।

सोहम शाह फिल्म डेवलेपर्स के निदेशक सोहम शाह उर्फ सुरेश शाह, अमिता शाह, मुकेश शाह ने कूटरचित सेल डीड को असली के रूप में इस्तेमाल करते हुए कानूनी प्रक्रिया का दुरूपयोग करते हुए उपखण्ड अधिकारी के समक्ष खातेदार घोषित करने हेतू राजस्व वाद पेश किया।

संजय अग्रवाल, हल्का पटवारी 4 एमएल ओम प्रकाश सहारण एवं गिरदावर ने यह जानते हुए उक्त भूमि औद्योगिक भूमि है इसलिए टेनेन्सी एक्ट के प्रावधान लागू नही होते। माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय ने फर्म की ओर से पेश याचिका सिविल रिट पैटीशन नम्बर 3852/1998 दिनांक 17.11.1998 को एडमिशन स्टेज पर ही खारिज करके फर्म के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी की थी

लेकिन उन्होंनेे टेनेन्सी एक्ट के प्रावधानों व निदेशों की अवज्ञा करते हुए भ्रष्टतापूर्वक अपने पद का दुरूपयोग करते हुए कृषि भूमि होने की मिथ्या तात्विक प्रविष्टि करके राजस्थान टेनेन्सी एक्ट के प्रावधानों के प्रतिकूल कुूटरचित विभाजन प्रस्ताव तैयार करके छल के प्रयोजन से कूटरचित विभाजन प्रस्ताव को असली के रूप में इस्तेमाल करते कूटरचित विभाजन प्रस्ताव एवं पत्र संख्या भू0अ0/1514 दि0 18.06.2021 को तेयार करके कूटरचित विभाजन प्रस्ताव को छल के प्रयोजन से साजिस के तहत असली के रूप में इस्तेमाल करते हुए उप खण्ड अधिकारी के समक्ष पेश किया।


उम्मेद सिंह रतनू उप खण्ड अधिकारी श्रीगंगानगर ने राजस्व वाद संख्या 57/2021 में दिनांक 17.06.2021 को कार्यरत तहसीलदार राजस्व श्रीगंगानगर, संजय अग्रवाल, पटवारी पटवार हल्का 4 एम एल, भू अभिलेख निरीक्षक पटवार हल्का 4 एम एल ने अभियुक्त संख्या 4 ता 6 को अनुचित रूप से फायदा पहुंचाने की नियत से उनके साथ एक राय होकर रची सुनियोजित गोपनीय साजिस के तहत भ्रष्टतापूर्वक यह जानते हुए कि फर्म गणेश आयल एण्ड जनरल मिल की औद्योगिक भूमि है, मौका पर अभियुक्त संख्या 4 ता 6 ने कोई काश्त नहीं की है, सिंचाई विभाग से पानी स्वीकृत नहीं है, सिचंाई के लिए खाला नहीं है, प्रश्नगत भूमि के औद्योगिक भूमि के रूप में उपयोग करने हेतू जिला कलक्टर के आदेश पर दिनांक 05.02.2021 को नियमन फीस 25 लाख 49 हजार 325 रूपये गणेश आयल एण्ड जनरल मिल्स के भागीदार रामभज से जरिए चालान जमा कराई इसलिए कृषि भूमि नहीं है और नामजद

मुलजिमान द्वारा साजिश के तहत तैयार कूटरचित विभाजन प्रस्ताव की आड़ में उप ण्ड अधिकारी उम्मेद सिंह रतनू ने यह जानते हुए कि उक्त भूमि कृषि भूमि नहीं है बल्कि औ़द्योगिक भूमि है इसलिए टेनेन्सी एक्ट के तहत उन्हें अकृषि भूमि के संबंध में आदेश पारित करने हेतू धारा 53(ए) के तहत अधिकारिता हासिल नहीं है लेकिन नामजद मुलजिमान को अनुचित फायदा पहुंचाने की नियत से उनके साथ राय होकर रची सुनियोजित गोपनीय आपराधिक साजिस के तहत माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा 17.11.1998 को पारित आदेश एवं राजस्थान टेनेन्सी एक्ट के आज्ञाप्क प्रावधानों के निदेशों की अवज्ञा करते हुए गैरकानूनी रूप से भ्रष्टतापूर्वक मनमाने तौर पर बेईमानी से राजस्व रिकार्ड में अमल दरामद करने का आदेश व डिक्री पारित करके सरकार व फर्म के साथ धोखा व बेईमानी की।


परिवादी ने एसएचओ और पुलिस अधीक्षक को नामजद मुलजिमान उम्मेद सिंह उप खण्ड अधिकारी, संजय अग्रवाल तहसीलदार, ओम प्रकाश सहारण पटवारी हल्का 4 एम एल, गिरदावर 4 एम एल, सोहम शाह फिल्म डेवलेपर्स कम्पनी के भागीदार सोहम शाह उर्फ सुरेश शाह, अमिता शाह पत्नी सुरेश शाह, मुकेश शाह व अन्य अज्ञात सह अभियुक्तगण द्वारा कारित जुर्म की इतिला देकर उनके खिलाफ एफआइआर दर्ज करने का अनुरोध किया लेकिन उन्होंने एफआइआर दर्ज नहीं की। मजबूरन अदालत के समक्ष दायर इस्तगासे में विद्वान मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डॉ0 महेन्द्र कुमार ने परिवाद में दर्ज तथ्यों व दस्तावेजी साक्ष्य से नामजद मुुुुलजिमान द्वारा संज्ञेय जुर्म कारित करने का तथ्य प्रकट होने पर एसएचओ कोतवाली को एफआईआर दर्ज करके अनुसंधान नतीजा पेश करने का आदेश दिया। एसएचओ कोतवाली ने एफआईआर  नम्बर 199/2022 दर्ज सुपुर्द की है।


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