राजस्थान समाचार : श्रीगंगानगर - वाल्मीकि समाज को अलग आरक्षण की माँग हुई मुखर वाल्मीकि अम्बेडकर आंदोलन के आह्वान पर वाल्मीकि समाज के विभिन्न संगठनों ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन


श्रीगंगानगर : वाल्मीकि समाज को अलग आरक्षण की माँग दिनोंदिन मुखर होती जा रही है। वाल्मीकि अम्बेडकर आंदोलन अन्तर्गत आदि धर्म समाज के आह्वान पर आज पूरे राजस्थान में वाल्मीकि समाज के विभिन्न संगठनों द्वारा मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजे गए। इसी कड़ी में आज श्रीगंगानगर में वाल्मीकि अम्बेडकर आंदोलन के राजस्थान प्रदेशाध्यक्ष सत्यनारायण नागवंशी के नेतृत्व में सर्वप्रथम विधायक राजकुमार गौड़ को मुख्यमंत्री के नाम का ज्ञापन सौंपा गया। प्रचारक विजय द्राविड़ तथा अशोक सुमाली ने बताया कि तत्पश्चात् जिला कलक्टर श्रीमती रूक्मिणी रियार सियाग के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। 


इस अवसर पर शिष्टमण्डल में पार्षद बंटी वाल्मीकि, जिला वाल्मीकि सभा अध्यक्ष रामशरण कोचर, अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस अध्यक्ष महेन्द्र काली, राजीव अछूत, ज्योति धारीवाल, देव चौहान, सलीम चौहान, सुरेश लोट, आरजी सारसर, डोडी वाल्मीकि, अनिल सारवान, सम्राट रोहतकिया, सोहनलाल सारवान, सुरेन्द्र, साहिल अनादि, मनीष दैत्य, मनीष दानव, राकेश उज्जीनवाल, अमन वाल्मीकि, अनिकेत एकलव्य, विक्की लोट, नरेश लोट, सहित वाल्मीकि समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे।  


वाल्मीकि अम्बेडकर आंदोलन द्वारा दर्शन रत्न रावण जी के निर्देशानुसार सौंपे गए ज्ञापन में माँग की गई है कि आजादी के 75 वर्षों के बाद भी वाल्मीकि समाज की आर्थिक, सामाजिक व शैक्षणिक दशा ज्यों की त्यों है। वाल्मीकि समाज के लिये अलग आरक्षण की मांग को प्रथम बार पंजाब सरकार के दिवंगत मुख्यमंत्री डॉ. ज्ञानी जैल सिंह ने गम्भीरता से लेते हुए वर्ष 1975 में वाल्मीकि मजहबी जाति (सफाईकर्मी) के लिये उनकी आबादी के अनुपात अनुरूप कुल आरक्षण का 50 प्रतिशत हिस्सा निर्धारित कर दिया। पंजाब सरकार का अनुसरण करते हुए 9 सितम्बर 1994 में हरियाणा सरकार ने वाल्मीकियों के लिये अलग आरक्षण व्यवस्था लागू की। इसके बाद आंध्रप्रदेश में अनुसूचित जाति में 59 जातियों को चार भागों में बांटकर सुनिश्चित किया कि आरक्षण का लाभ सभी जातियों को बराबर मिल सके। इसके बाद उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री रहते हुए राजनाथ सिंह ने 14 सितम्बर 2002 को अलग आरक्षण व्यवस्था के लिये अध्यादेश लागू किया जिसे मायावती सरकार ने रद्द कर दिया। 


राजस्थान सरकार ने अपने पत्रांक एफ/7(3) कार्मिक/क-2/2007 जयपुर दिनांक 11 मई 2007 के द्वारा केवल सफाई कर्मचारी वाल्मीकि जाति के पोस्ट ग्रेजुएट बच्चों को सरकारी सेवाओं में भर्ती का आदेश जारी कर एक तरह से अलग आरक्षण व्यवस्था को मानने का प्रयास किया गया, किन्तु इन सभी आदशों को बार-बार रद्द करवाने का प्रयास सबल व सम्पन्न जातियों ने किया। भारत सरकार द्वारा आंध्रप्रदेश में अलग आरक्षण व्यवस्था के लिये गठित जस्टिस मेहरा आयोग ने अलग आरक्षण को न्याय संगत करार दिया। बिहार सरकार द्वारा गठित महादलित कमेटी ने अलग आरक्षण के पक्ष में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की तथा सितम्बर 2008 में तमिलनाडू सरकार ने सफाई कर्मचारी अरुन्धतियार जाति के लिये 3 प्रतिशत अलग आरक्षण की व्यवस्था की। वर्ष 1979 में माननीय न्यायाधीश संघावालिया तथा न्यायाधीश एस.एस. कंग ने वाल्मीकि/मजहबी जाति के लिये 50 प्रतिशत आरक्षण मामले पर फैसला सुनाते हुए लिखा कि अनुसूचित जातियों के लिये कुल आरक्षित कोटे का 50 प्रतिशत वाल्मीकि मजहबी जाति के लिए आरक्षण संवैधानिक रूप से उचित है।



वाल्मीकि अम्बेडकर आंदोलन के पदाधिकारियों ने कहा कि 7 अगस्त, 2006 को सुप्रीम कोर्ट के माननीय न्यायाधीश एआर लक्ष्मण तथा माननीय न्यायाधीश लोकेश्वर सिंह ने झारखण्ड सरकार के पिछड़ा वर्ग में अति पिछड़ा वर्ग केस का फैसला सुनाते हुए कहा कि ‘किसी जाति विशेष के पिछड़ेपन के साक्ष्य मौजूद हो तो उसके लिये अलग आरक्षण की व्यवस्था की जा सकती है।’ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग भारत सरकार ने मार्च 2000 में वाल्मीकि समाज को अलग आरक्षण की सफारिश अपनी रिपोर्ट में की थी। वाल्मीकि अम्बेडकर आन्दोलन द्वारा उपरोक्त तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री से पुरजोर शब्दों में राजस्थान के वाल्मीकि समाज के लिये अलग आरक्षण की मांग की गई है। इसके साथ-साथ वाल्मीकि समाज के हित में अनेक ज्वलंत समस्याओं के निराकरण की भी माँग की गई है।

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