राजस्थान समाचार : श्रीगंगानगर - हजूम हजूम और सिर्फ हजूम जहां देखो वहीं नीली और केसरी पगड़ियों का सैलाब

गुरद्वारा धन-धन बाबा दीप सिंह जी शहीद में  'वारिस पंजाब दे' संस्था के मुख्य सेवादार भाई अमृतपाल सिंह का भव्य स्वागत

श्रीगंगानगर। बोले सो निहाल, सत श्री अकाल, वाहेगुरु जी का खालसा वाहेगुरु जी की फतेह जैसे जोश जनून और जज्बे से लबरेज कौमी परवानों के मुख से निकले  जयकारे  फिजा को महका रहे थे। अवसर  था वारिस पंजाब की जत्थेबंदी के मुख्य सेवादार भाई अमृतपाल सिंह खालसा के श्री गंगानगर आने का, जिन्हें राजस्थान की सिख संगत भाई तेजिंदर पाल सिंह टिम्मा की अगुवाई में श्रीगंगानगर की पंजाब सरहद साधुवाली बार्डर से पदमपुर रोड स्थित गुरद्वारा धन-धन बाबा दीप सिंह जी शहीद में सम्मान व पूरे उत्साह से लेकर पहुंची। कोडा चौक से खालसा नगर तक काफिले के साथ चल रही संगतो के काफिले से जाम की स्थिति बन गई। 

दीवान हाल में जहां पंथ प्रसिद्ध ढाढ़ी-जत्थे भाई गुरप्रीत सिंह लांङरां वालों की वारों  (कविताओं) ने सिख योद्धाओं की शौर्य-गाथाओं से संगत को रोमांचित किया वहीं भाई तेजिंदर पाल सिंह टिम्मा ने 20वीं सदी के इतिहास ऑपरेशन ब्लू स्टार की दर्दनाक दास्तान व हुकूमत के जुल्मों की कहानी से लेकर दिल्ली के सिख कत्लेआम के मंजर को जब बयां किया तो संगत के रोंगटे खड़े हो गए। इस अवसर पर भाई अमृतपाल सिंह ने केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि मेरी जांच करवाने से पहले सरकार गुजरात के उन बंदरगाहों की जांच करवाए, जहां से करोड़ों रुपये की स्मैक व चिट्टा पंजाब के लोगों की नस्लकुशी करने के लिए पंजाब भेजां जा रहा है। 

उन्होंने कहा कि सिख नोजवानो को गुरमत के रास्ते पर चलना चाहिए। अमृत छककर गुरु के सिद्धांत पर चलना चाहिए। भाई अमृतपाल सिंह ने गंगानगर की सिख संगत विशेषकर सिख नौजवानो की भरपूर प्रशंसा करते हुए कहा कि जिस तरह का जोश और जनून के साथ राजस्थान की संगत ने प्यार दिया है

ऐसा जोश तो पंजाब में देखने को नही मिला। समागम की समाप्ति पर बीबी हरमीत कौर खालसा गोलूवाला, गुरद्वारा बाबा दीप सिंह कमेटी सहित एक नूर खालसा फौज,सिख स्टूडेंट्स फैडरेशन व निहंग सिंह जत्थेबंदियों की और से अमृतपाल सिंह का सम्मान किया गया। गुरूद्वारा साहिब के मुख्य सेवादार तेजेन्द्र पाल सिंह टिम्मा ने बताया कि समागम में हजारों की तादाद में गुरुद्वारा साहिब में पंहुंची संगत जोकि दरबार हाल के अलावा बाहर भी विराजमान थीं उनमें पंथ के प्रति एक नई उर्जा का संचार हुआ है।









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