कवच पाठ , आरती संग्रह : श्री कुबेर आरती

 

आरती संग्रह

श्री कुबेर आरती

===================================================================================================================


ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे ,

स्वामी जै यक्ष जै यक्ष कुबेर हरे।

 

शरण पड़े भगतों के,

भण्डार कुबेर भरे।

 

॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

 

शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,

स्वामी भक्त कुबेर बड़े।

 

दैत्य दानव मानव से,

कई-कई युद्ध लड़े ॥

 

॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

 

स्वर्ण सिंहासन बैठे,

सिर पर छत्र फिरे,

स्वामी सिर पर छत्र फिरे।

 

योगिनी मंगल गावैं,

सब जय जय कार करैं॥

 

॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

 

गदा त्रिशूल हाथ में,

शस्त्र बहुत धरे,

स्वामी शस्त्र बहुत धरे।

 

दुख भय संकट मोचन,

धनुष टंकार करें॥

 

॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

 

भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,

स्वामी व्यंजन बहुत बने।

 

मोहन भोग लगावैं,

साथ में उड़द चने॥

 

॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

 

बल बुद्धि विद्या दाता,

हम तेरी शरण पड़े,

स्वामी हम तेरी शरण पड़े

 

अपने भक्त जनों के ,

सारे काम संवारे॥

 

॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

 

मुकुट मणी की शोभा,

मोतियन हार गले,

स्वामी मोतियन हार गले।

 

अगर कपूर की बाती,

घी की जोत जले॥

 

॥ ऊँ जै यक्ष कुबेर हरे…॥

 

यक्ष कुबेर जी की आरती ,

जो कोई नर गावे,

स्वामी जो कोई नर गावे ।

 

कहत प्रेमपाल स्वामी,

मनवांछित फल पावे।


========================================================================================================================

 

॥ इति श्री कुबेर आरती ॥


-------------------------------------------------------------------------------------------------------------

=========================================================================


एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ