राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने जन्मदिन पर भाजपा को अपनी शक्ति का अहसास करवाया तो भाजपा आलाकमान के रुख पड़ा नरम
राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे सिंधिया से भारतीय जनता पार्टी के बड़े नेता लगातार उपेक्षा कर रही हैं !जबकि दूसरी तरफ राजे खामोशी से सही वक्त का इंतजार करती रही है और इसी के साथ-साथ वसुंधरा राजे जिस प्रकार से अपने वजूद का एहसास करवा रही. है उसे. देखकर आलाकमान अब यह समझ चुकी है कि राजस्थान में सत्ता पाने के लिए वसुंधरा राजे की उपेक्षा करना महंगा पड़ेगा!
आपको याद होगा कि राजे की अनदेखी कर उनके विरोधी विधायक सतीश पूनिया को पार्टी का सूबेदार बनाया गया और कई बार के लोकसभा सदस्य होने के बावजूद उनके बेटे को केंद्र में मंत्री नहीं बनाया गया। लेकिन अब चुनावी वर्ष आया तो वसुंधरा ने अपनी ताकत दिखाने के लिए सक्रियता बढ़ा दी । और यह सब देखकर आलाकमान में खलबली मच चुकी है !आलाकमान इस बात को राजस्थान के बैनर पोस्टरों पर भी वसुंधरा का फोटो नजर आने को भी आलाकमान के रुख में बदलाव के रूप में ही देखा जा रहा है।
वसुंधरा हाईकमान को लगातार अपनी ताकत का एहसास करवा रही है। सालासर स्थित प्रसिद्ध समझ चुकी है कि यदि वसुंधरा राजे की उपेक्षा की हनुमान मंदिर में आयोजित उनके जन्मदिन कार्य में गई तो राजस्थान की सत्ता भाजपा के हाथ से निकल जाएगी हजारों की संख्या में उनके समर्थकों ने आलाकमान को भी यह संदेश पहुंचा बिना राजे के राजस्थान में सत्ता वापस पाना सरल नहीं होगा। वसुंधरा राजे के प्रतिअब हाईकमान का रवैया नरम पड़ता जा रहा है ! आपको बता दें कि अभी हाल में हैदराबाद में सम्पन्न हुई पार्टी की कार्यकारिणी की बैठक में अमित शाह ने दिया है कि राजस्थान में वसुंधरा राजे धरातल से जुड़ी हुई नेता है!
कुल मिलाकर 2 सांसद, 52 विधायक और 8 पूर्व विधायक जन्मदिन के फागोत्सव में शामिल हुए। करीब एक लाख लोगों के भोजन का बंदोबस्त किया था महारानी ने। वसुंधरा राज्य का परिचय राजनीतिक गलियारे में राजस्थान की यशस्वी पूर्व चर्चा यह चल रही है कि मुख्यमंत्री कहकर कराया था।इस साल पार्टी के अब हाईकमान का रुख राजे के प्रति लगातार नर्मदिखाई देगा!
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