श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन उमड़े श्रद्धालु , प्रेम के बिना भगवान नहीं मिलते , स्वामी दयानन्द सरस्वती महाराज - shreemadbhaagavat katha gyaan yagy ke teesare din umade shraddhaalu
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श्रीगंगानगर: श्योजीराम केसर देवी गोयल चेरिटेबल ट्रस्ट द्वारा एल ब्लॉक स्थित हनुमान मन्दिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन कथावाचक स्वामी दयानन्द सरस्वती महाराज वृंदावन ने अपने प्रवचनों में कहा कि प्रेम के बिना भगवान नहीं मिलते। प्रेम हरि का रूप है तथा हरि प्रेम का रूप है। ‘हरि व्यापक सर्वत्र समाना, प्रेम ते प्रकट होई मैं जाना’। उन्होंने कहा कि अपना अभिमान त्यागने पर ही प्रेम मिलता है तथा प्रभु की प्राप्ति होती है। मैं नहीं, मेरा कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेरा’ द्वारा उन्होंने प्रेम की पराकाष्ठा का महत्व समझाया।
उन्होंने भजनों द्वारा समझाया कि ‘भक्त हर पल कहता है कि हे प्रभु, जिसमें तेरी रजा है, उसी में मेरी रजा है।’ सज्जन व दुर्जन की परिभाषा बताते हुए कहा कि बड़ा व्यक्ति वही है, जिसकी इच्छायें व कामनायें मिट जाती है तथा जो हर परिस्थिति में संतुष्ट रहता है, उसका रूतबा सबसे ऊंचा है। उन्होंने भागवत की विभिन्न कथाओं के प्रसंगों व भजनों द्वारा ईश्वर की महिमा का गुणगान किया। समाजसेवी विजय कुमार गोयल, रतनलाल चमडिय़ा, मनोज मोदी, प्रो. रजनी शर्मा को स्वामी दयानंद सरस्वती महाराज द्वारा सम्मान प्रतीक देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम संयोजक डॉ. ओ.पी. गोयल, डॉ. नरेश गोयल, डॉ. नितेश गोयल, डॉ. नुपुर गोयल, डॉ. शैफाली गोयल, नीता चमडिय़ा, जगीरचंद फरमा, मनीराम सेतिया, इन्दुभूषण चावला, सुशील पटेल, सूरजभान सरदाना, कुंदनलाल मिड्ढा, पं. जयदीप शर्मा, पं. शुक्ला जी, अशोक किंगर, जगदीश कुमार सहित अनेकों गण्यमान्य व्यक्तियों ने आरती में भाग लिया। तत्पश्चात् श्रद्धालुओं को प्रसाद का वितरण किया गया।
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