श्री गंगानगर के जाने माने हर वर्ग के दुख सुख में हर समय तैयार रहने वाले श्री गंगानगर के चेंबर ऑफ कॉमर्स से जुड़े समाज सेवी शहीद बाबा दीपसिंह जी गुरुद्वारा के मुख्य सेवादार हर दिल अजीज भाई श्री तेजेंदर पाल सिंह टिम्मा देश द्रोह के आरोप से बरी हो गए हैं श्री टिम्मा पर तत्कालीन सरकार ने देश द्रोह का मामला दर्ज किया था जिसे आज जोधपुर हाईकोर्ट ने अपना फैसला देते हुए बाइज्जत बरी कर दिया श्री टिम्मा ने अपनी फेसबुक पर एक पोस्ट शेयर कर ये जानकारी दी।
फेसबुक पोस्ट
जोधपुर हाईकोर्ट----
कोर्ट संख्या 5--
केस---सरकार बनाम तेजिंदर पाल सिंह टिम्मा
कोर्ट लाइव-- खचाखच भरी कोर्ट में न्याय की कुर्सी पर जज साहब विराजमान थे। आज सभी की आंखें देश मे बने नए कानून के तहत तेजिंदर पाल सिंह टिम्मा पर देशद्रोह के केस की सुनवाई पर टिकी हुई थी। कोर्ट में सन्नाटा ऐसा कि सुई भी गिरे तो आवाज़ आये। इस सन्नाटे को चीरती एक आवाज़ कोर्ट में गूंज रही थी। आवाज़ से उठती दलील और अपील को सुनने के लिए वकीलों का जमावड़ा लगा हुआ था। हर वकील बहुत कुछ सीखने के लिए एक एक शब्द का अर्थ समझने के लिए कोर्ट में मौजूद था। जैसे जैसे लय और ताल की आवाज़ में पैनापन आता गया तैसे तैसे विरोधी ग्रुप के झूठे सबूतों और तथाकथित राष्ट्रवाद के झूठे दावों की धज्जियां उड़ती नज़र आई। जिसने भी इस बहस को सुना कायल हो गया।
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ये वकील कोई और नही बस साधारण सी कद काठी का हंसमुख सा नौजवान था। जब वो कोर्ट में दलील रखता है तो बड़े बड़े वकील उसको सुनने आते हैं। जिसकी गाथाएं हाईकोर्ट के हर तीसरे चैंबर में चलती रहती हैं। यह वकील कोई और नही हाईकोर्ट जोधपुर के चंद धुरंधर वकीलों में एक वकील विकास बालिया जी हैं। जिनका आम से लेकर कारपोरेट घराने तक एक जलवा है,एक रुतबा है, शौहरत है अलग पहचान है। और मेरी खुशकिस्मती है कि हाईकोर्ट जोधपुर के एक वरिष्ठ व सम्मानित, हरफनमौला व हरदिल अज़ीज़,वकालत के पेशे के आधारभूत स्तंभ मित्र के माध्यम विकास बालिया जी से मिला। देश का देशद्रोह का पहला केस था मिल बैठकर एक रणनीति बनाई गई। बार संघ के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट संजीव दीक्षित जी ने डॉक्युमेंट्स से वियु रचना तैयार की, कम्प्यूटर से भी शार्प मैमोरी वाले एडवोकेट नितिन गोकलानी जी को बालिया जी के सहायक नियुक्त हुए। और फिर कानूनविदों की यह सेना निकल पड़ी झूठ की बुनियाद पर खड़े किए देशद्रोह के झूठे केस की धज्जियां उड़ाने। सत्य की कसौटी पर जब विकास बालिया जी ने दलीलों के तीर चलाये तो देशद्रोह का सारा झूठा केस ताश के पत्तों की तरह धराशाई हो गया। फिर न्याय की कुर्सी पर बिराजमान जज महोदय ने अभियोजन पक्ष के आधार को कानून की कसौटी पर स्थापित नही माना और बस यूं धराशायी हो गए विरोधियों के मंसूबे व रद्द हो गया झूठ और साज़िश की बुनियाद पर नए कानून के तहत दर्ज किया देशद्रोह का देश का पहला मुकदमा था ।
श्री तेजेंद्र पाल सिंह टिम्मा जी आदरणीय बड़े भाई साहब को पूरी न्यूज टीम की ओर से बधाई आप ऐसे ही जन मानस की सेवा करते रहे









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