Ajmer 1992 blackmail case : अजमेर ब्लैकमेल कांड के आरोपियों को जमानत, हाईकोर्ट ने उम्रकैद के फैसले पर लगाई रोक

Ajmer 1992 blackmail case : अजमेर ब्लैकमेल कांड के आरोपियों को जमानत, हाईकोर्ट ने उम्रकैद के फैसले पर लगाई रोक

अजमेर ब्लैकमेल कांड के आरोपियों को जमानत, हाईकोर्ट ने उम्रकैद के फैसले पर लगाई रोक


अजमेर ब्लैकमेल कांड के आरोपियों को जमानत, हाईकोर्ट ने उम्रकैद के फैसले पर लगाई रोक

राजस्थान: हाईकोर्ट ने 1992 अजमेर के ब्लैकमेल कांड में बड़ा फैसला सुनाया. पॉक्सो कोर्ट की आजीवन कारावास की सजा पर रोक लगाते हुए मुख्य आरोपियों को जमानत दी गई. इस मामले में 100 से ज्यादा छात्राओं के साथ हैवानियत हुई थी

अजमेर ब्लैकमेल कांड के आरोपी

राजस्थान में अजमेर के 1992 के चर्चित फोटो ब्लैकमेल कांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने पॉक्सो कोर्ट के आजीवन कारावास के फैसले पर रोक लगाते हुए मुख्य आरोपियों नफीस चिश्ती, इकबाल भाटी, सलीम चिश्ती और सैयद जमीर हुसैन समेत छह लोगों को जमानत दे दी. यह मामला 32 साल बाद फिर सुर्खियों में है. पिछले साल 20 अगस्त 2024 को पॉक्सो कोर्ट ने इन आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी


100 से ज्यादा छात्राओं की जिंदगी बर्बाद

1992 में अजमेर में हुआ यह कांड पूरे देश को हिलाकर रख देने वाला था. 100 से अधिक कॉलेज छात्राओं को ब्लैकमेल कर उनके साथ गैंगरेप और अश्लील तस्वीरें खींचने का सिलसिला सामने आया. बदनामी के डर से कई छात्राओं ने आत्महत्या तक कर ली. इस मामले ने समाज को झकझोर दिया और जांच सीआईडी-सीबी को सौंपी गई. कुल 18 लोग इस कांड में आरोपी बनाए गए


Ajmer 1992 blackmail case


कैसे शुरू हुआ यह घिनौना खेल

मामले की शुरुआत एक बिजनेसमैन के बेटे के साथ कुकर्म से हुई. उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें खींचकर उसे ब्लैकमेल किया गया. इसके बाद उसकी मदद से उसकी सहेलियों को निशाना बनाया गया. तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल कर गैंगरेप का सिलसिला चलता रहा. मुकदमे में 104 गवाहों के बयान दर्ज हुए, जिनमें तीन पीड़िताएं आखिरी समय तक अपने बयान पर डटी रहीं. पॉक्सो कोर्ट ने 208 पेज के विस्तृत फैसले में आरोपियों को दोषी ठहराया था

Ajmer 1992 blackmail case


हाईकोर्ट का फैसला और नई लड़ाई

हाईकोर्ट के इस फैसले ने पीड़ितों के जख्मों को फिर हरा कर दिया है. आरोपियों को जमानत मिलने से पीड़ित पक्ष में नाराजगी है और अब नई कानूनी लड़ाई की तैयारी शुरू हो सकती है





क्या है पूरा मामला?

32 साल पहले यानी 1992 में, अजमेर के एक निजी गर्ल्स कॉलेज में पढ़ने वाली छात्र-छात्राओं को ख्वाजा गरीब नवाज के खादिम आरोपी बहला फुसला कर अलग-अलग फार्म हाउस में ले गए थे. वहां उनके साथ आरोपियों ने गलत काम किया और उनके अश्लील फोटो कमरे में खींच ली. इसके बाद अश्लील फोटो व वीडियो वायरल करने का डर दिखाकर आरोपियों ने पीड़ित लड़कियों की सहेलियों के साथ भी अलग-अलग फार्म हाउस में गलत काम किया


इस मामले में करीब 100 प्रकरण ऐसे सामने आए थे, जिन्हें करीब 18 आरोपियों ने गलत काम कर उनको ब्लैकमेल किया था. इस मामले में 18 आरोपियों में से 9 आरोपियों को सजाया सुनाई जा चुकी है. एक आरोपी ने आत्महत्या कर ली थी. वहीं एक अन्य आरोपी के खिलाफ लड़के से कुकर्म करने का अलग मामला चल रहा है. इस मामले में एक आरोपी आज दिनांक तक फरार है, जिसे भगोड़ा घोषित कर रखा है


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