पाकिस्तान : सत्ता छीन जाने का डर सता रहा है इमरान खान को क्या इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का विचार पाकिस्तान का इतिहास फिर दुहराया जायगा ।






 पाकिस्तान : सत्ता छीन जाने का डर सता रहा है इमरान खान को क्या पाकिस्तान का इतिहास फिर दुहराया जायगा । 


पाकिस्तान की खबर - इमरान खान जिन्हें अपने देश के पूर्व प्रधानमंत्रीयो के कार्यकाल में  उनके साथ क्या हुआ वहा के सैन्य अधिकारियों ने कितनी बार तख्ता पलटा ये सब देख कर उन्हें भी डर लगने लगा है । कि कही उनकी कुर्सी भी ना छीन ली जाये ।


इमरान खान  के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का विचार 


यहाँ हम बात करेगे पाकिस्तानी राजनीति की क्यो की वहां राजनीतिक पार्टियों ने एकजुटता कर उनके खिलाफअविश्वास प्रस्ताव लाने का विचार कर रहे है सबसे बड़ी बात तो ये है कि इमरान के साथी नेता भी इस काम मे विरोधियों के साथ है और उन्हें किसी भी तरीके से कुर्सी से हटाना चाहते हैं। 




और अगर अविश्वास प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो जैसे कि नियम है सभी मेम्बर को वोटिंग करनी होगी और हालात बता रहै है कि इमरान खान इस समय अल्पमत में साफ तौर पर दिखाई दे रहे है । क्योंकि इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीके इंसाफ , के सांसद इमरान खान के खिलाफ वोट करेगे जिनकी सख्या 25 के करीब बताई गई है । 




और अगर प्रधानमंत्री इमरान खान के अपने से सांसद उन्हें गच्चा दे कर खिलाफ वोट कर गए तो इमरान की सरकार का गिरना तय है । ओर ये होता है तो पाकिस्तान का ये इतिहास फिर दुहराया जायगे जिसमे कई प्रधानमंत्री इस तरह के षड्यंत्र के बीच फस कर अपनी कुर्सी गवा चुके है या उन्हें सेना ने कुर्सी से उतार दिया है पिछली बार की घटना आप सब को पता है जब मिल्ट्री चीफ परवेज मुशर्रफ ने सत्ता पट कब्जा किया था ।





पाकिस्तान में बीते 7 दशक से भी ज्यादा का इतिहास


पाकिस्तान में बीते 7 दशक से भी ज्यादा का इतिहास है कि कोई भी प्रधानमंत्री वहां अपना कार्यकाल पूरा नही कर सका क्योकि वहां हालात ऐसे ही है वहा कोई भी नेता किसी पर अंधा विश्वास नही कर सकता कोन कब कौनसी गोटी खेल जाये इसका डर लगा रहता है ।इससे पहले नवाज शरीफ को एक केश के चलते दोषी ठहराया गया और उन्हें अपनी कुर्सी चली गयी फिर दुबारा उन्होंने शता हासिल की लेकिन फिर उन्हें 2साल में ही कुर्सी छोड़नी पड़ी (1997से1999) तीसरी बार भी इतिहास ने अपने आपको दुहराया ओर कोर्ट के फसलें के बाद उन्हें फिर जाना पड़ा 2013से2917के कार्यकल में । इससे पहले 1999में जब तख्ता पलट हुया था तो परवेज मुशर्रफ ने प्रधानमंत्री को हटा कर नजर बन्द कर लिया था । 






नवाज शरीफ के पहली बार प्रधानमंत्री बनने से पहले के हालात तो ओर ज्यादा भहवाय है


उससे पहले यानी कि नवाज शरीफ के पहली बार प्रधानमंत्री बनने से पहले के हालात तो ओर ज्यादा भहवाय है जिसमे पहले प्रधानमंत्री को जो मुस्लिम लीग के थे उन्हें 1951में गोली मारी गयी दूसरे प्रधानमंत्री ख्वाजा नजमुद्दीन ने सत्ता हासिल की तो उन्हें भी इसी तरह 2साल में अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी क्यो की उन्हें वहां के गवर्नर जनरल ने हटा कर खुद कुर्सी पर काबिज हो गए थे। 


फिर आते है मोहम्मद अली बोगला जो इन सबसे तेज़ गति से आये और चले गए क्यो की राष्ट्रपति चुनाव के चलते विवादों में फस कर इस्तीफा दे दिया । फिर आये शाहिद सुहरावर्दी जो दो साल रहे और उन्हें भी पद छोड़ना पड़ा फिर 2महीने के लिये इस्माइल चुड़िगर प्रधानमंत्री बने और फिर फिरोज खान नून प्रधानमंत्री बने लेकिन साल भर में उन्हें मार्शल ला लागू होने पर बर्खास्त किया गया यानी के 10साल में 8 से ज्यादा प्रधानमंत्री बने ।







सैन्य अधिकारियों ने भी बहुत बार प्रधानमंत्रियो को पद से हटाया 


इस लिये अब इमरान खान को भी डर लगने लगा है कि कही इतिहास फिर से ना दुबारा जाए क्योंकि  उनका कार्यकाल पिछले सभी प्रधानमंत्रियो से ज्यादा हो गया है करीब करीब जिसका कारण राजीनीतिक सरगर्मियां और वहां के सैन्य शासक भी है क्यो की इतने सालों के इतिहास में सैन्य अधिकारियों ने भी बहुत बार प्रधानमंत्रियो को पद से हटाया और सत्ता पर कब्जा किया 




जिनमे पहली बार 1977से 1985 तक आर्मी की हकूमत रही थी उसके बाद मुहम्मद जुनेजा फिर बेनजीर भुट्टो प्रधानमंत्रियो की लिस्ट में शामिल हुई इस सब बातों को देखते हुए इमरान खान का मौजूदा समय उनकी सत्ता जाने का इशारा कर रहा है क्यो वो सख्त वे ईमानदार प्रधानमंत्रि माने जाते है तो उन्हें वहां के भृष्टाचारी नेताओ वे अफसरों द्वारा हटाना आसान होगा । समय किस करवट बदल जायेगा देखते है कि क्या कुर्सी बचेगी या होगी पुरानी कहानी शुरू इमरान खान का आगे प्रधानमंत्री बना रहा मुश्किल लग रहा है ।




 इंटरनेट व सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रकाशित


लेखक पत्रकार  जितेंद्र कुमार


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