RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने अपनी एक उंगली पर गोवर्धन पहाड़ को उठाया था और गोपाल ने यह सोचा कि उनकी लकड़ियों के बल पर गोवर्धन पर्वत रुका हुआ है जब भगवान श्री कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली को हटाया तो पर्वत नीचे की ओर झुकने लगा तब भोपाल लोगों को इस बात का पता चला कि यह पर्वत तो भगवान श्री कृष्ण की छोटी उंगली से ही रुका हुआ है
कनखल में बुधवार को पूर्णानंद आश्रम में ब्रह्मलीन महामंडलेश्वर श्री 1008 स्वामी दिव्यानंद गिरि की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा में बोलते हुए आरएसएस प्रमुख श्री मोहन भागवत ने कहा कि भारत लगातार उन्नति कर रहा है और आगे बढ़ रहा है अब भारत किस उन्नति के रास्ते में अगर कोई रुकावट पैदा करने के लिए आएगा तो उसका नामोनिशान मिट जाएगा
मोहन भागवत ने कहा कि हम अहिंसा की बात नहीं कर सकते और ना ही करते हैं ना ही करेंगे पर इस बात को कहने के लिए हम अपने हाथों में डंडा भी लेकर चलते हैं हमारे मन में कोई द्वेष शत्रुता दुश्मनी का भाव कभी नहीं है लेकिन दुनिया हमारी इस ताकत को समय मानती है तो इसमें हम क्या कर सकते हैं RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने अपनी एक उंगली पर गोवर्धन पहाड़ को उठाया था और गोपाल ने यह सोचा कि उनकी लकड़ियों के बल पर गोवर्धन पर्वत रुका हुआ है जब भगवान श्री कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली को हटाया तो पर्वत नीचे की ओर झुकने लगा तब भोपाल लोगों को इस बात का पता चला कि यह पर्वत तो भगवान श्री कृष्ण की छोटी उंगली से ही रुका हुआ है
ऐसे ही लकड़ियों को तो हम सब लाएंगे पर सतगुरु के रूप में ऐसे महान कार्य के लिए अपनी उंगली लगेगी तो स्वामी विवेकानंद मालिश अरविंद के सपनों का अखंड भारत बनाने में हमें जल्द से जल्द कामयाबी मिलेगी उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म और भारत एक समान शब्द है लेकिन अब राज्य बदलता है तो राजा भी बदल दिया जाता है उन्होंने कहा कि हमारी राष्ट्रीयता गंगा के प्रवाह की तरह बहती है जब तक राष्ट्र है तब तक हमारे धर्म है धर्म के प्रयास के उत्थान के लिए प्रयास होगा तो भारत का भी उत्थान होगा 1000 साल तक भारत में हमारे सनातन धर्म को लगातार समाप्त करने के हथकंडे अपनाए गए
और प्रयास किए गए मगर वह सनातन धर्म को मिटा ना सके और खुद मिट गए पर हम और सनातन धर्म आज भी वही है मोहन भागवत बोले की हिंदुस्तान एक ऐसा मुल्क है जहां दुनिया का हर प्रकार का वक्त ही आकर दृष्ट प्रवृत्ति को खत्म कर देता है और उसकी तस्वीर भी समाप्त हो जाती है वह भारत देश में आकर या तो अपने आप ठीक हो जाता है या फिर मिट जाता है जो भागवत ने कहा कि जो तथाकथित लोग सनातन धर्म विरोध करते रहे हैं उनका भी संयोग है अगर वह सनातन धर्म का विरोध ना करते तो हिंदू कभी नहीं जाता इस मौके पर महामंडलेश्वर स्वामी गिरिधर स्वामी अशोक आनंद भारती स्वामी विवेकानंद अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव रविंद्रपुरी महामंडलेश्वर हरि चेतन आनंद आदि उपस्थित थे

0 टिप्पणियाँ