भवन निर्माण श्रमिकों की समस्याओं के निराकरण के लिए भवन निर्माण मिस्त्री मजदूर यूनियन (सीटू) ने किया प्रदर्शन निर्माण श्रमिकों के कल्याण हेतु बोर्ड द्वारा स्वीकृत योजनाओं का लाभ देने में चली आ रही असाधारण पेन्डेन्सी पर भारी आक्रोश व्यक्त किया
श्रीगंगानगर : भवन निर्माण मिस्त्री मजदूर यूनियन (सीटू) के जिला महामंत्री का. हरकेवलदीप सिंह के नेतृत्व में आज सैंकड़ों भवन निर्माण श्रमिकों ने आज अपनी विभिन्न समस्याओं के निराकरण की माँग को लेकर जिला कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। तत्पश्चात् जिला कलक्टर के माध्यम से श्रम मंत्री, श्रम सचिव तथा श्रम आयुक्त राजस्थान सरकार को ज्ञापन भेजा गया। इसके बाद श्रम उपायुक्त श्रम विभाग श्रीगंगानगर को भी ज्ञापन सौंपा गया।
जिला कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन के दौरान सभा को जिला महामंत्री का. हरकेवलदीप सिंह, का. लखविन्द्र सिंह, का. मोहनलाल, का. अमरीक सिंह विजयनगर, का. राजेन्द्र सिंह अनूपगढ़, का. बलजीत सिंह घड़साना, पेंटर यूनियन अध्यक्ष वेदपाल सिंह आदि ने सम्बोधित किया। जिला महामंत्री का. हरकेवलदीप सिंह ने निर्माण श्रमिकों के कल्याण हेतु भवन एवं संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड द्वारा स्वीकृत योजनाओं का लाभ देने में चली आ रही असाधारण पेन्डेन्सी पर भारी आक्रोश व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि श्रम विभाग द्वारा समय पर प्रभावी कदम नहीं उठाने से विभिन्न कल्याण योजनाओं के आवेदन फार्मों का अम्बार लगता चला गया, जिनकी संख्या श्रम विभाग द्वारा 7,77,880 बताई गई है।
इस समस्या के बारे में हमारे सीटू संगठन सहित अन्य श्रम संगठनों ने भी अनेकों बार श्रम विभाग के समक्ष उठाया तथा आग्रह किया कि इस काम में हो रही भारी धाँधलेबाजी में पूर्व भाजपा सरकार के पूर्व मंत्री स्तर से लेकर आई.ए.एस अधिकारियों और नीचे तक राज्य स्तर के अधिकारियों ने इस काम में अनियमितताओं और लेनदेन को बढ़ावा देकर अनुचित लाभ उठाया है। यही कारण था कि श्रम विभाग एवं राज्य सरकार स्तर पर यह कार्य उपखंड अधिकारी/विकास अधिकारी पंचायतराज से लेकर वापस श्रम विभाग को सौंपा गया, जिसके चलते प्रभावी तो नहीं, लेकिन गलत मामलों पर कुछ अंकुश लगा। अब यह आश्चर्य का विषय है कि मुख्यमंत्री की बजट घोषणा की आड़ में श्रम सचिव राजस्थान द्वारा भवन एवं संनिर्माण श्रमिक बोर्ड की बिना कोई बैठक बुलाए अथवा राज्य में भारत सरकार के मान्यता प्राप्त श्रम संगठनों से कोई विचार-विमर्श किए आनन-फानन में श्रम सचिव, राजस्थान सरकार ने दिनांक 07.03.2022 को एक परिपत्र संख्या एफ18( ) भनिकम/1104 जारी किया, जिसमें लंबित पड़े कल्याण योजनाओं के भौतिक सत्यापन के दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
जिला महामंत्री का. हरकेवलदीप सिंह ने कहा कि इन निर्देशों अनुसार भौतिक सत्यापन समिति के लिए गठित कमेटियों में कहीं भी केन्द्रीय श्रम संगठनों को शामिल करने का उल्लेख नहीं है, जबकि एन.जी.ओ./सिविल सोसायटी तक को शामिल करने का निर्देश दिया गया है। मजे की बात यह है कि ये तथाकथित निर्देश भवन एवं संनिर्माण श्रमिक मंडल की ओर से जारी किए गए है, जो पद के दुरूपयोग का ज्वंलत उदाहरण है। इस प्रकार श्रम विभाग द्वारा भवन एवं संनिर्माण श्रमिक मंडल एवं केन्द्रीय श्रम संगठनों की पूर्णतया अनदेखी की गई है, जो अनुचित एवं कानून विरोधी है। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए श्रम आयुक्त महोदय ने 22.03.2022 को श्रम सचिव के दिनांक 07.03.2022 को बिना कल्याण बोर्ड की बैठक अनाधिकृत एंव गैरकानूनी निर्देशों की समीक्षा हेतु एक वीडियों कांफ्रेस आयोजित की, जिसमें भौतिक सत्यापन हेतु दिए गए प्रपत्रों में जिलों से प्राप्त संशोधन सुझावों पर विचार-विमर्श किया गया।
यह अत्यंत खेद का विषय है कि श्रम आयुक्त ने भी इस वर्चुअल बैठक में ना तो भवन एवं संनिर्माण श्रमिक मंडल के सदस्यों को ही बुलाया और ना ही केन्द्रीय श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों को। यहाँ यह गंभीर मंथन का विषय है कि श्रम सचिव एवं श्रम आयुक्त जैसे जिम्मेदार अधिकारी मुख्यमंत्री के आह्वान पर अति-सक्रियता दिखाते हुए स्वयं ही राज्य सरकार द्वारा नियुक्त त्रिपक्षीय भवन एवं संनिर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड को बाईपास कर रहे हैं जिसके लिए ना तो वे और ना ही मुख्यमंत्री स्वयं अधिकार प्राप्त हैं। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि पहले तो श्रम विभाग ने स्वयं ही वर्ष 2018 से लेकर वर्ष 2022 तक कल्याणकारी योजनाओं के आवेदनों का पहाड़ खड़ा कर लिया और इन जिम्मेदार एवं मोटी तनख्वाह पाने वाले अधिकारियों ने समय रहते यह सत्यापन अभियान समय-समय पर क्यों नहीं चलाया
यही है अफसरशाही की कार्यशैली का बदनुमा उदाहरण।
जिला महामंत्री का. हरकेवल दीप सिंह ने बताया कि भवन निर्माण मिस्त्री मजदूर यूनियन (सीटू) ने केन्द्रीय श्रम संगठनों और राज्य सरकार द्वारा भवन एवं संनिर्माण अधिनियम, 1996 के प्रावधानों अनुसार गठित भवन एवं संनिर्माण श्रमिक कल्याण मंडल की अनदेखी पर गहरा विरोध करते हुए तत्काल निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। इसके साथ-साथ श्रम विभाग कार्यालय में कितने एनजीओ और सिविल सोसायटी रजिस्टर्ड हैं? उनकी सूची भी उपलब्ध करवाने की मांग की गई है। इस अवसर पर सैंकड़ों भवन निर्माण श्रमिक एवं यूनियन पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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