श्रीगंगानगर : सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाएं महासंघ के तत्वाधान में डॉ. ओ.पी. गोयल के निवास पर विश्व विख्यात साहित्यकार नोबल पुरस्कार से सम्मानित रविन्द्र टैगोर की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. ओ.पी. गोयल एवं विशिष्ट अतिथि जगीरचंद फरमा, मदनलाल जोशी, एडवोकेट राजेन्द्र शर्मा, डॉ. ओ.पी. वैश, अशोक किंगर, एमएल जैन व पीसी गर्ग थे तथा अध्यक्षता रमेश सिंगल ने की।मुख्य अतिथि डॉ. ओपी गोयल ने कहा कि रविन्द्र नाथ टैगोर भारतीय संस्कृति के पुरोध थे, जिन्होंने अपनी कविताओं व नाटकों द्वारा देशवासियों में स्वतंत्रता की अलख जगाई।
मदनलाल जोशी ने कहा कि गुरुदेव के नाम से विख्यात रविन्द्र नाथ टैगोर विश्व विख्यात साहित्यकार थे, जिन्होंने देश में शिक्षा की अलख जगाई। जगीरचंद फरमा ने कहा कि रविन्द्र नाथ टैगोर एक ऐसे महान कवि थे, जिनकी दो रचनायें दो देशें का राष्ट्रगान बनी। भारत का राष्ट्रगान जन-गण-मन व बांग्लादेश का राष्ट्रगान आमार सोनार उन्हीं की देन है।
मनीराम सेतिया ने कहा कि रविन्द्र नाथ टैगोर कुशाग्र बुद्धि व बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे, जो काव्य मर्मज्ञ के साथ-साथ संगीत मर्मज्ञ भी थे, उनके द्वारा स्थापित शान्ति निकेतन संस्था विद्यार्थियों को आदर्श मानव बनाने की शिक्षा देती है।
एमएल जैन, अशोक किंगर, एडवोकेट राजेन्द्र कुमार शर्मा आदि वक्ताओं ने कहा कि रविन्द्र नाथ टैगेर प्रकृति प्रेमी थे तथा मानवता को राष्ट्रवाद से अधिक महत्व देते थे। वे कहते थे कि हम सब भाई-भाई हैं, अमीर-गरीब का भेद निरर्थक है। उनकी अंग्रेजी कविताओं का संग्रह गीतांजलि पूरे विश्व के विख्यात है। इसी पुस्तक पर रविन्द्र नाथ टैगोर को नोबल पुरस्कार से नवाजा गया।
कार्यक्रम में धर्मचंद बेदी, रजनीश नागपाल, इन्दुभूषण चावला, पी.सी. गर्ग, विजय कुमार अरोड़ा, द्वारका प्रसाद नागपाल, धर्मवीर भारद्वाज, परमानंद छाबड़ा, हेमराज सहित उपस्थित समस्त पदाधिकारियों व सदस्यों ने रविन्द्रनाथ टैगोर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।
अध्यक्ष रमेश सिंगल ने कहा कि रविन्द्र नाथ टैगोर के जीवन दर्शन को जीवन में अपनाने तथा विश्व शान्ति स्थापित करने के लिए उनके द्वारा लिखी गई काव्य रचनाओं को अपनाने की जरूरत है। मंच संचालन मनीराम सेतिया ने किया।

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