यूके में मंकीपॉक्स ; बंदरों और चूहों से होने वाला संक्रमण मंकीपॉक्स ब्रिटेन पहुंचा ,मंकीपॉक्स बीमारी का दूसरा मामला मिलने से मचा हड़कंप , जानें इस मंकीपॉक्स संक्रामक बीमारी के लक्षण और इलाज

UK-लंदन: ब्रिटेन में मंकीपॉक्स के दूसरे मामले की पुष्टि होने के बाद वहां हड़कंप मचा हुआ है। यह बीमारी संक्रमित बंदरों या चूहों जैसे जीवों से इंसानों में फैलती है। ब्रिटेन के स्वास्थ्य  विभाग के 1 अधिकारियों ने कहा है कि हाल में नाइजीरिया से एक संक्रमित व्यक्ति आया है। ऐसे मे यह आशंका जताई जा रही है कि इस मरीज को मंकीपॉक्स बीमारी का संक्रमण उसी  के देश में हुआ है। 

 

मंकीपॉक्स एक बहुत ही दुर्लभ संक्रमण है जो इंसानों के बीच आसानी से नहीं फैलता। इसके बावजूद कोरोना वायरस की चपेट में आने से लाखों  इंसानों को खो चुके ब्रिटेन में  वहां के लोगों के मन में  इस बीमारी का डर बैठा हुआ है। डॉक्टरों का मानना है कि इसके लक्षण भी मामूली होते हैं। इसमें अधिकतर मामलों में रोगी कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। हालांकि कुछ मामलों मेंमेरी बारी गंभीर रूप भी दे सकती है । 2018 में ब्रिटेन में मंकीपॉक्स के पहले मामले की पुष्टि  हुई थी।

 

मरीज का इलाज जारी है 

 

संक्रमित व्यक्ति का उपचार सेंट थॉमस अस्पताल में विशेष इकाई में किया जा रहा है। अस्पताल के डॉक्टर निकोलस प्राइस ने कहा कि डॉक्टरों की एक टीम मरीज के स्वास्थ्य पर हल पल निगार रखे हुए है। फिलहाल उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।एजेंसी में क्लीनिकल एंड इमर्जिंग इन्फेक्शन्स के निदेशक डॉ कोलिन ब्राउन ने शनिवार को कहा कि हम एनएचएस इंग्लैंड और एनएचएस सुधार (एनएचएसईआई) के साथ काम कर रहे हैं ताकि पहले पुष्टि वाले मामलों में संक्रमितों के संपर्क में आये लोगों तक पहुंचकर उन्हें जरूरी सलाह दे सकें। 

 

क्या है मंकीपॉक्स?

(WHO) विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन  के मुताबिक 1970 में पहली बार इंसानों में मंकीपॉक्स का मामला सामने आया था। तब से लेकर अब तक अफ्रीका के 11 देशों में इस वायरस की मौजूदगी की पु‍ष्‍टि हो चुकी है। 1958 में मंकीपॉक्‍स के शुरुआती मामले सामने आए। जब रिसर्च के लिए रखे गए बंदरों में यह बीमारी फैली। इंसानों में मंकीपॉक्‍स का1970 में  पहला केस कान्‍गो (अफ्रीका) में दर्ज हुआ।

 

मंकीपॉक्स के संक्रमण से कितना खतरा?

इन्‍फेक्‍शन का खतरा मंकीपॉक्‍स से संक्रमित शख्‍स के संपर्क में आए लोगों में भी हो सकता है। हेल्‍थ एक्‍सपर्ट्स के अनुसार दुर्लभ मंकीपॉक्स वायरस चिकनपॉक्स वायरस फैमिली से संबंधित है इसका संक्रमण काफी  हद तक गंभीर भी हो सकता है संक्रमित व्यक्ति के शरीर पर बड़े-बड़े दानों के आधार पर इस संक्रमण की पहचान की जा सकती है। इस बारे में अधिकारी जांच कर रहे हैं

 

लक्षण क्या हैं मंकीपॉक्स के 

WHO विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के मुताबिक मंकीवायरस संक्रमण होने के बाद लक्षण दिखने में 6 से 13 दिन लग सकते हैं संक्रमितों को बुखार, तेज सिरदर्द, पीठ और मांसपेशियों में दर्द के साथ गंभीर कमजोरी महसूस हो सकती है। लिम्फ नोड्स की सूजन इसका सबसे आम लक्षण माना जाता है। बीमार शख्‍स के चेहरे और हाथ-पांव पर बड़े-बड़े दाने हो सकते हैं। अगर संक्रमण गंभीर हो तो ये दाने आंखों के कॉर्निया को भी प्रभावित कर सकते हैं।

 

इलाज क्या है मंकीपॉक्स का 

WHO विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन केअनुसार वर्तमान में मंकीपॉक्स का कोई इलाज उपलब्ध नहीं है चेचक के टीकों को मंकीपॉक्स के खिलाफ सुरक्षात्मक माना जाता है।


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