महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल:सऊदी अरब समेत 23 देश घटाएंगे कच्चे तेल का उत्पादन,जानिए कब और कितने बढ़ेंगे दाम,petrol-deejal 8? rupaye prati bairal tak badh sakatee hai keemat
सऊदी अरब, ईरान सहित 23 ओपेक प्लस देशों ने तेल उत्पादन में 11.65 लाख बैरल यानी लगभग 190 मिलियन लीटर प्रतिदिन की कटौती करने का फैसला किया है। सऊदी अरब अकेले पिछले साल की तुलना में 5% कम तेल का उत्पादन करेगा। इसी तरह इराक ने रोजाना करीब 2 लाख बैरल तेल के उत्पादन को कम करने की बात कही है इस बड़े फैसले की वजह बताते हुए सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्रालय ने कहा है कि ये कटौती ओपेक और गैर-ओपेक तेल उत्पादक देशों द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी. यह फैसला दुनिया भर के तेल बाजार को मजबूत करने के लिए लिया गया है।
दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब भी तेल के दाम कम होने लगते हैं तो ये देश उत्पादन घटाकर दाम बढ़ाने का काम करते हैं
तेल का उत्पादन घटाकर कीमत बढ़ाने का गणित
2020 जनवरी की बात है अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन 12.8 करोड़ बैरल प्रतिदिन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। वहीं, कोरोना महामारी की वजह से दुनिया भर में तेल की मांग में कमी आई है। वहीं, तेल के उत्पादन में कोई कमी नहीं आई इस वजह से तेल की कीमत में भारी गिरावट आई है
सऊदी अरब, इराक और अमेरिका में कई तेल ऑपरेटरों ने घाटे को कम करने के लिए अपने कुएं बंद कर दिए। तेल उत्पादन में इस कटौती के बाद एक बार फिर तेल की कीमत में इजाफा हुआ है।
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अभी 3 वजहे हैं तेल उत्पादन घटाने के फैसले के पीछे
1. फरवरी 2022 में जब रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था, तब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 139 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई थी। 2008 के बाद से कच्चा तेल कभी भी इस स्तर पर नहीं था। इसके बाद जब अमेरिका और रूस जैसे देशों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना रिजर्व तेल बेचना शुरू किया तो तेल की कीमतें नीचे आ गईं। नतीजतन मार्च 2023 में कच्चे तेल की कीमत गिरकर 75 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।
2. पूरी दुनिया में कच्चे तेल का वैश्विक भंडारण 18 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. ऐसे में भंडारण ज्यादा होने और मांग कम होने से तेल की कीमत में गिरावट आई है
3. 2008-2009 में वित्तीय संकट के कारण, कच्चे तेल की कीमत केवल 5 महीनों के भीतर 148 डॉलर से गिरकर 32 डॉलर हो गई। अब अमेरिका में सिलिकॉन वैली, सिग्नेचर और फर्स्ट रिपब्लिक जैसे बड़े बैंकों के डूबने से एक बार फिर तेल की कीमत में गिरावट आने की आशंका है.
इस फैसले का असर- दाम 850 रुपए प्रति बैरल तक बढ़ सकते हैं
ओपेक प्लस देशों के इस फैसले के बाद पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का रास्ता साफ हो गया है। कीमत को लेकर दुनिया की दो बड़ी संस्थाओं और एक विशेषज्ञ ने अपना-अपना अनुमान जताया हैनिवेश फर्म पिकरिंग एनर्जी पार्टनर्स ने बताया कि तेल की कीमत में 10 डॉलर यानी 850 रुपये प्रति बैरल की बढ़ोतरी हो सकती है. अगर इसी तरह तेल का उत्पादन घटता रहा तो आने वाले दिनों में कीमत और बढ़ सकती है।
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गोल्डमैन सैक्स ने कहा है कि ओपेक प्लस देशों के इस फैसले के बाद ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 86 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। यह कीमत पिछले एक महीने में सबसे ज्यादा है। दिसंबर 2023 तक कच्चे तेल की कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा रहने की उम्मीद है ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा का कहना है कि ओपेक+ देशों के इस फैसले से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे,लेकिन कितने बढ़ेंगे, यह कहना मुश्किल है. तनेजा कहते हैं कि किसी देश में तेल की कीमत 3 चीजों से तय होती है
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