अमेरिका से 30 प्रीडेटर सशस्त्र ड्रोन खरीदने के लिए भारत के साथ बातचीत अंतिम चरण में है

BREAKING NEWS BREAKING NEWS

  R BHARAT PLUS BREAKING NEWS

 








अमेरिका से 30 प्रीडेटर सशस्त्र ड्रोन खरीदने

 के लिए भारत के साथ बातचीत अंतिम चरण में है

अमेरिका पहली बार गैर-नाटो साझेदार के साथ ड्रोन खरीद समझौते पर हस्ताक्षर कर रहा है भारत के रक्षा मंत्रालय के रक्षा खरीद बोर्ड ने पिछले ही साल इन ड्रोन की खरीद को हरी झंडी दी है।

 

                                    

30 प्रीडेटर सशस्त्र ड्रोन की खरीद के लिए अमेरिका कि भारत के साथ बातचीत

 अंतिम दौर में है। इनकी अनुमानित लागत तीन अरब डालर है। यह पहला

 मौका है जब अमेरिका किसी गैर नाटो सहयोगी देश को ये बेजोड़ ड्रोन बेच रहा

 है। सूत्रों का कहना है कि ये ड्रोन समुद्र के साथ-साथ पाकिस्तान व चीन से लगे

 सीमाओं की निगरानी करने में काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं।




वाशिंगटन, अमेरिका से 30 प्रीडेटर सशस्त्र ड्रोन की खरीद के लिए भारत के साथ बातचीत अंतिम दौर में है। इनकी अनुमानित लागत तीन अरब डालर है।


 

अमेरिका किसी गैर नाटो सहयोगी देश को ये बेजोड़ ड्रोन बेच रहा है। ये लंबी दूरी तक सटीक मार करने में सक्षम हैं। प्रधानमंत्री मोदी की वर्ष 2017 में अमेरिका की यात्रा के दौरान पूर्व ट्रंप प्रशासन ने इस प्रमुख सौदे की घोषणा की थी।

 



दोनों देशों ने बातचीत तेज कर दी और भारत को बेचे जाने वाले ऐसे

 ड्रोन की संख्या 10 से बढ़ाकर 30 कर दी गई। इनमें से 10-10 ड्रोन

 नौसेना, वायु सेना व थल सेना को दिए जाएंगे। सूत्रों ने बताया कि

 भारत व अमेरिकी सरकार के बीच 30 विमानों के प्रीडेटर (MQ9B)

एमक्यू9बी खरीद कार्यक्रम पर बाचतीत अंतिम चरण में है। उनके

 अनुसार यह प्रमुख रक्षा साझेदार का दर्जा बनाए रखने की क्षमता है।

 एमटीसीआर (MTCR )में भारत को शामिल करने के लिए कई वर्षो

 तक बुनियादी समझौतों पर काम किया गया है। भारत इस क्षमता को

 हासिल करने वाला पहला गैर नाटो साझेदार होगा।


 



जनरल एटामिक्स द्वारा निर्मित ये ड्रोन रक्षा उद्योग में बेजोड़ हैं।

 सूत्रों ने भारत द्वारा इस करार को ठंडे बस्ते में डाले जाने की

 किसी भी जानकारी से इन्कार किया है। दोनों देशों की

 नौकरशाही की प्रक्रिया धीमी होने की स्थिति में भारतीय

 सेनाओं ने जनरल एटामिक्स से दो सर्विलांस प्रीडेटर किराए पर

 लिए हैं। सूत्रों का कहना है कि ये ड्रोन समुद्र के साथ-साथ

 पाकिस्तान व चीन से लगे सीमाओं की निगरानी करने में

 काफी उपयोगी साबित हो रहे हैं। भारत के रक्षा मंत्रालय के

 रक्षा खरीद बोर्ड ने पिछले ही साल इन ड्रोन की खरीद को हरी

 झंडी दी है।










   

BREAKING NEWS BREAKING NEWS

  R BHARAT PLUS BREAKING NEWS

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ