राजस्थान समाचार : श्रीगंगानगर आस्था के दृढ़ विश्वास का समुंदर बुधरवाली में उमड़े लाखों श्रद्धालु सभी ने एक स्वर में कहा ‘सतगुरु तेरे थे, तेरे हैं और तेरे ही रहेंगे’

साध-संगत ने एक साथ हाथ उठाकर प्रण लिया कि ‘सतगुरु हम तेरे थे, तेरे हैं और सदा तेरे ही रहेंगे। डेरा सच्चा सौदा के 74वें स्थापना दिवस में साध संगत का उत्साह इतना कि छोटे पड़ गए पंडाल

श्रीगंगानगर : डेरा सच्चा सौदा का 74वां स्थापना दिवस और 15वां ‘रूहानी जाम-ए-इन्सां’ मौजपुर धाम बुधरवाली में साध-संगत ने हर्षोल्लासपूर्वक धूमधाम से मनाया। पावन भंडारे की नामचर्चा को लेकर भारी तादाद में पहुंची साध-संगत में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। कलयुग के इस दौर में भक्तों की अपने सतगुरु के प्रति दृढ़ विश्वास की आस्था का समुंदर बहते हर किसी ने देखा। साध-संगत ने एक साथ हाथ उठाकर प्रण लिया कि ‘सतगुरु हम तेरे थे, तेरे हैं और सदा तेरे ही रहेंगे। दुनिया की कोई भी ताकत हमें आपसे जुदा नहीं कर सकती, आपके प्रति हमारा दृढ़ विश्वास अटल है।


पावन भंडारे पर 229 जरूरतमंद परिवारों को राशन किटें दी गई। वहीं भीषण गर्मी के मद्देनजर पक्षियों के लिए 1029 परिंडे भी बांटें गए। इस मौके पर दो जरूरतमंद व्यक्तियों को ट्राई साइकिल भी दी गई।

भंगीदास संपूर्ण सिंह इंसा ने बताया कि परिंदे हमारे पर्यावरण को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं इसलिए पूज्य गुरूजी की प्रेरणा से इस भयंकर गर्मी में पक्षियों के लिए पानी के कसोरे रखे जाएंगे। नाम चर्चा में बड़ी-बड़ी स्क्रीनों के माध्यम से पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के अनमोल वचन साध-संगत ने बड़ी श्रद्धा के साथ श्रवण किये और इन वचनो को अपने जीवन में अमल करने का संकल्प लिया। 

नामचर्चा के दौरान सादुलशहर नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष प्रदीप खीचड़, श्रीगंगानगर विधानसभा से प्रत्याशी रही विनीता आहुजा के प्रतिनिधि डा. दर्शन आहुजा तथा महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष कमला बिश्नोई सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। गणमान्य व्यक्तियों ने डेरा सच्चा सौदा द्वारा किए जा रहे सामाजिक कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की तथा मीडिया के माध्यम से आमजन से भी पूज्य गुरुजी के पवित्र वचनों को मानने की अपील की।

छोटा पड़ गया पंडाल

डेरा सच्चा सौदा के स्थापना दिवस के मौके पर अनुयाइयों का उत्साह देखने लायक था। अनुयाइयों के आने का सिलसिला सुबह से ही शुरू हो गया और दोपहर तक लगातार चलता रहा। पावन भंडारे पर अढ़ाई लाख से अधिक अनुयाई विभिन्न जगहों से पहुंचे जिसके चलते अनुयाइयों के लिए लगाए गए पंडाल छोटे पड़ गए तथा तीन बार पंडाल और लगाने पड़े। इसके बाद भी हजारो की संख्या में अनुयाई पंडाल के बाहर या जहाँ जगह मिली, वहीं बैठ गए।

गर्मी को देखते हुए किए गए विशेष इंतजाम :-  इलाके में पड़ रही भयंकर गर्मी को देखते हुए सेवादारों द्वारा विशेष इंतजाम किये गए। जगह-जगह ठंडे पानी की छबीलें लगाई गई। इसके साथ-साथ दरबार में भी भाईयों और बहनों की पानी की सेवा पहुंचाई गई। श्रद्धालुओं के बैठने के लिए छायादार पंडाल की व्यवस्था की गई, इसके साथ-साथ कूलर और पंखों की भी व्यवस्था की गई। ट्रैफिक सेवादारों द्वारा श्रद्धालुओं के वाहनों को बड़ी तरतीब से ग्राउंड में पंक्तिबद्ध लगाया गया और सडक़ों पर लगातार ड्यूटी देकर जाम से बचाया गया।

परिंदो की सेवा को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान :- नामचर्चा के दौरान रणजीत सिंह द्वारा साध-संगत से मानवता भलाई कार्यों को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आहवान किया गया और भीषण गर्मी में बेजुबान परिंदों के लिए अपने-अपने घरों की छतों व आस-पास के पेड़ों पर परिंडे बांधने और उनमें नियमित रूप से दाना-पानी उपलब्ध करवाने की बात कही गई, जिस पर मौजूद अनुयाइयों ने अपने घरों पर परिंडे बांधने की शपथ ली। इस दौरान उन्हें नामचर्चा में ही परिंडे उपलब्ध करवाए गए।

दुनियाभर में मनाया जाता है स्थापना दिवस :- सेवादार सोहनलाल इन्सां व गोकुल इन्सां ने बताया कि डेरा सच्चा सौदा सरसा की 29 अप्रैल 1948 को पहली पातशाही पूजनीय बेपरवाह साईं शाह मस्ताना जी महाराज ने स्थापना की थी। इसलिए डेरा सच्चा सौदा के दुनियांभर में मौजूद 7 करोड़ श्रद्धालु पूरे अप्रैल माह को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा शुरू किए गए 138 मानवता भलाई कार्यों को अंजाम देकर मनाते हैं।

दोनों हाथ खड़े कर पूज्य गुरूजी के प्रति दिखाई दृढ़ता  

नामचर्चा के दौरान पूज्य गुरूजी का नौवां पत्र पढक़र सुनाया गया, जिसके बाद साध-संगत में भी काफी उत्साह देखने को मिला। पत्र में गुरुजी ने रूस व यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के जल्द खत्म होने और विश्व में शांति स्थापना की प्रार्थना की तथा साध-संगत से भी ऐसा करने का आह्वान किया। उन्होंने अपने बेटे व बेटियों के बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने की अनुमति दी है। वहीं उन्होंने कहा कि हमनें कभी भी किसी भी धर्म की निंदा, बेअदबी या बुराई करनी तो दूर ऐसी कभी कल्पना भी नहीं की। बल्कि हम तो खुद सर्वधर्म का सत्कार करते हैं

व सबको सत्कार करने की शिक्षा देते हैं। डेरा में आपसी कलह की बात को अफवाह मानते हुए उन्होंने लिखा है कि परिवार और सेवादार एक साथ हैं। इस दौरान रणजीत सिंह ने कहा कि पूज्य गुरूजी पिछले साढ़े चार सालो से देह रूप में हमारे बीच नहीं है लेकिन पूज्य गुरूजी के प्रति हमारा विश्वास व लगाव बिल्कुल भी नहीं टूटा है। हमें अपने सच्चे सतगुरु पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां पर पूरा दृढ़ विश्वास है और दुनिया की कोई भी ताकत साध-संगत की एकजुटता को राई के दाने जितना भी कम नहीं कर सकती। इस पर नामचर्चा पंडाल में उमड़ी साध-संगत ने ‘धन-धन सतगुरु तेरा ही आसरा’ के पवित्र नारे के साथ दोनों हाथ ऊपर उठाकर अपनी हामी भरी।

 

पावन भंडारे की नामचर्चा में नगोरा इंसा, बंता इन्सा, मानक इन्सा, स्टेट 45 मैंबर सोहन लाल नागपाल, योगेश चुघ, सुखनाम सिंह, संतोष सिंह, हरि सिंह, हरीश बजाज, चानन सिंह, बलजीत सिंह, गुरमेल सिंह, गोपाल, राकेश धींगड़ा, शिवकुमार यूथ 45 मैंबर गुरसेवक, अशोक चंद, सुखचंद, दिलीप कुमार, दिलराज सिंह, लखजीत सिंह, मेजर सिंह, रोनित कुमार, गुरजंट सिंह, सोहनलाल, मदनलाल, सुरेश मरेजा, रिंकू नागपाल, मोमनराम, वेद पूनियां, सुखमंदर सिंह इंसा सहित शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंग के सेवादार भाई-बहन और ब्लॉक कमेटी के सदस्यों का भरपूर सहयोग रहा।

 












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