अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ और मंगलकारी तिथि माना गया है। अक्षय तृतीया एक अबूझ मुहूर्त है, यानी इस तिथि पर कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त देखे किया जा सकता है। अक्षय तृतीया का त्यौहार वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार 3 मई को है। अक्षय तृतीया को अखातीज के नाम से भी जाना जाता है।
अक्षय का अर्थ होता है 'जिसका कभी भी क्षय न हो यानी कभी नाश न हो'। शास्त्रों के अनुसार कि इस दिन किया गया शुभ कार्य, दान-पुण्य, स्नान, पूजा और तप करने से अक्षय फल की प्राप्ति होता है। अक्षय तृतीया पर सोने के आभूषण खरीदने के खास परंपरा होती है। अक्षय तृतीया के दिन अगर व्यक्ति सोना खरीदे उससे के जीवन में सदैव माता लक्ष्मी का आशीर्वाद बना रहता है। साथ ही व्यक्ति का जीवन सुख और वैभव से भर जाता है.
इस विशेष दिन पर शुभ कार्य करने, शुभ खरीदारी करने और दान करने की विशेष महत्व होता है। अक्षय तृतीया पर किया गया शुभ कार्य हमेशा सफल होता है।इस बार अक्षय तृतीया का त्योहार रोहिणी नक्षत्र और शोभन योग में मनाया जाएगा। इसके अलावा 03 मई मंगलवार और रोहिणी नक्षत्र के संयोग से मंगल रोहिणी योग का निर्माण होने जा रहा है, वहीं इस अक्षय तृतीया पर दो प्रमुख ग्रह स्वराशि और दो ग्रह अपनी उच्च राशि में मौजूद रहेंगे। इस तरह का संयोग 50 वर्षों के बाद बनने जा रहा है।
अक्षय तृतीया के दिन चंद्रमा अपनी उच्च राशि यानी वृषभ में मौजूद होंगे और सुख और वैभव प्रदाता ग्रह शुक्र अपनी उच्च राशि मीन में होंगे। इसके अलावा शनि देव अपनी स्वराशि कुंभ में और सदैव शुभ फल देने वाले देवगुरु बृहस्पति स्व राशि मीन में विराजमान रहेंगे। इन चार बड़े ग्रहों का अक्षय तृतीया के दिन अपने अनुकूल स्थिति में होने से अक्षय तृतीया का महत्व काफी बढ़ गया है। इस तरह का शुभ और मंगलकारी संयोग बनने सेअक्षय तृतीया पर शुभ खरीदारी करने और माता लक्ष्मी संग भगवान विष्णु की उपासना करने से विशेष फल की प्राप्ति होगी।
श्री विष्णु धर्म सूत्र, मत्स्य पुराण, नारदीय पुराण तथा भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।इसी कारण इस दिन को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। इसके साथ ही इस दिन परशुराम का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है।,इस दिन भागीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थी। इस दिन मां अन्नपूर्णा का भी जन्म हुआ था। इसलिए माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन रसोई घर और अनाज की पूजा करने के साथ भूखे को भोजन जरूर कराना चाहिए।
श्री विष्णु धर्म सूत्र, मत्स्य पुराण, नारदीय पुराण तथा भविष्य पुराण के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।इसी कारण इस दिन को अक्षय तृतीया के रूप में मनाया जाता है। इसके साथ ही इस दिन परशुराम का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है।,इस दिन भागीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थी। इस दिन मां अन्नपूर्णा का भी जन्म हुआ था। इसलिए माना जाता है कि अक्षय तृतीया के दिन रसोई घर और अनाज की पूजा करने के साथ भूखे को भोजन जरूर कराना चाहिए।
अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान शंकर से कुबेर जी का महालक्ष्मी की पूजा करने के लिए कहा था। इसी कारण अक्षय तृतीया के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। अक्षय तृतीया के मौके पर ही महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखना शुरू किया था। इसी ग्रंथ में श्री भगवत गीता भी समाहित है। इस दिन श्री भगवत गीता के 18वें अध्याय का पाठ जरूर करना चाहिए। साथ ही अक्षय तृतीया के दिन ही नर-नारायण ने भी अवतार लिया था। इसी कारण इसे शुभ माना जाता है। महाभारत के अनुसार, इस दिन भगवान कृष्ण ने वनवास के दौरान पांडवों को 'अक्षय पत्र' भेंट किया था। अक्षय पात्र कभी भी खाली नहीं रहता है। यह हमेशा अन्न से भरा रहता है, जिससे पांडवों को अन्न की प्राप्ति होती रहती थी।
डॉ ब्रह्म भाटिया
हस्तरेखा विशेषज्ञ
9414220573
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