राजस्थान समाचार : श्रीगंगानगर -विवेकानन्द सेवा ट्रस्ट द्वारा ‘गौ सेवा - गौ पूजन’ प्रकल्प के तहत गौवंश को हरा चारा एवं सवामणी खिलाई गई जीवन में गौ सेवा से मिलती है सुख-शांति और समृद्धि

गौ पूजन’ प्रकल्प के तहत गौवंश को हरा चारा एवं सवामणी खिलाई गई  जीवन में गौ सेवा से मिलती है सुख-शांति और समृद्धि गर्मी को देखते हुए विद्यार्थियों के लिए जल मंदिर निर्माण की घोषणा


श्रीगंगानगर : विवेकानन्द सेवा ट्रस्ट द्वारा ‘गौ सेवा - गौ पूजन’ प्रकल्प के तहत सुखाडिय़ा सर्किल स्थित श्रीगौशाला में गौवंश को एक ट्रॉली हरा चारा एवं दो सवामणी खिलाकर गौ सेवा की गई। इस अवसर पर संरक्षक नरेश चमङिय़ा, सुरेश खेमका, अध्यक्ष राधेश्याम गुप्ता, उपाध्यक्ष राजकुमार गुप्ता, बाबूलाल गुप्ता, सुनील भठेजा, श्याम सुन्दर बंसल, संजय सरना, जगीर चन्द फरमा, रतन लाल गुप्ता, इन्दूभूषण चावला, अभिषेक गुप्ता, मयंक खेमका, महिला शक्ति रितू चमङिय़ा, रेणू खेमका, रेणू गुप्ता, कविता गुप्ता, संगीता गुप्ता, रिम्पा तलवार सहित विवेकानन्द सेवा ट्रस्ट पदाधिकारी, सदस्य व गौसेवक उपस्थित थे।


इस कार्यक्रम के दौरान महात्मा गाँधी राजकीय विद्यालय नं. 5 पुलिस लाईन की प्रधानाचार्य श्रीमती रिम्पा तलवार द्वारा भीषण गर्मी को देखते हुए विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए जल सेवा हेतु जल मंदिर निर्माण का आग्रह किया गया, जिसे विवेकानन्द सेवा ट्रस्ट के पदाधिकारियों व सदस्यों द्वारा सहर्ष स्वीकार करते हुए जल मंदिर निर्माण करवाने की स्वीकृति प्रदान की। जल मंदिर में रविप्रकाश चमडिय़ा चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा भी सहयोग प्रदान किया जाएगा। प्रधानाचार्य द्वारा इस पुनीत कार्य के लिए अविलम्ब स्वीकृति जताने पर विवेकानंद सेवा ट्रस्ट एवं रविप्रकाश चमडिय़ा चैरिटेबल ट्रस्ट के समस्त पदाधिकारियों व सदस्यों का आभार व्यक्त किया गया।


अध्यक्ष राधेश्याम गुप्ता ने गौशाला में सेवा करने तथा जल मंदिर निर्माण में सहयोग के लिए सभी सदस्यों को साधुवाद दिया। उन्होंने कहा कि गौ सेवा करने से मानव जीवन को सुख-शांति और समृद्धि मिलती है। हर मानव को गौसेवा करने से बेहतर फल की प्राप्ति होती है। गौसेवा को परम धर्म माना गया है। ऐसी मान्यता है की गाय मे 33 करोड़ देवी देवताओं का निवास है। इसलिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को गाय की सेवा करनी चाहिए।

उपाध्यक्ष राजकुमार गुप्ता ने गौ माता की सेवा के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में योगदान देते हुए विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए जल मंदिर निर्माण को पुनीत सेवा कार्य बताया। उन्होंने कहा कि ‘जल है तो जीवन है’ तथा जल को अमृततुल्य बताया गया है। सृष्टि के पंच भौतिक तत्वों में जल का सर्वाधिक महत्व है और यही जीवन का मूल आधार है। धरती पर जलाभाव की समस्या एवं उत्तरोत्तर बढ़ रही है। हमारी प्राचीन संस्कृति में जल वर्षण उचित समय पर चाहने के लिए यज्ञ आदि किया जाता है। गर्मी के मौसम में पथिक को ठण्डा मिल सके, इसके लिए जगह-जगह प्याऊ चलाए जाते हैं।


सुरेश खेमका ने गौ सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गाय सेवा करने वाला व्यक्ति पुण्य का भागीदार बनता है। एक मात्र गाय की सेवा करने से ही मन, वाणी, कर्म और शरीर की पवित्रता संभव है। और तो और गौ सेवा से व्यक्ति अपने सम्पूर्ण कुल की रक्षा कर सकता है, सम्पूर्ण सृष्टि की सुरक्षा केवल गौमाता की रक्षा से ही संभव है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपने समय एवं सामथ्र्य के अनुसार गाय की सेवा करनी चाहिए। इससे जहां व्यक्ति एवं समाज निरोगी होगा वहीं मानसिक रूप से भी संतुष्ट भी बनेगा।


जगीर फरमा ने बताया कि आज समाज में जल की समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। आवश्यक कार्य से घर से बाहर जाने पर हम सब पानी लेकर निकलते हैं। गर्मी इतनी है कि एक लीटर पानी की बोतल कुछ समय में ही खत्म हो जाती है। इस पर प्यास बुझाने के लिए पानी की तलाश करनी पड़ती है। यदि जगह-जगह प्याऊ लगे होंगे तो सभी प्यास बुझा सकेंगे। गर्मी के मौसम में राहगीरों के लिए पानी की समस्या को हल करना सबसे बड़़ा सेवा कार्य है। इस सेवा कार्य की गौशाला स्टाफ एवं गौभक्तों ने मुक्तकंठ से सराहना की।


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