हास्य कवि सम्मेलन ने खूब रंग जमाया, श्रोताओं के ठहाके फूटे









श्रीगंगानगर : राष्ट्रीय कला मंदिर और सृजन सेवा संस्थान केसंयुक्त तत्वावधान में होली उत्सव के उपलक्ष में कल रविवार शाम को रोहितउद्योग परिसर में चौधरी रामजस सदन (ऑडिटोरियम) में हास्य कवि सम्मेलन काआयोजन किया गया। सम्मेलन में कवियों द्वारा प्रस्तुत हास्य रचनाओं परश्रोताओं के ठहाके फूटते रहे। बड़ी संख्या में श्रोताओं ने कवि सम्मेलनका लुफ्त उठाया। 


दीप प्रज्वलन से कवि सम्मेलन की शुरुआत हुई। मुख्य अतिथिनोजगे पब्लिक स्कूल के डायरेक्टर पी.सूदन ने प्रस्तुत काव्य रचनाओं कीप्रशंसा की। उन्होंने कवियों की परिकल्पनाओं को सराहा। राष्ट्रीय कलामंदिर के अध्यक्ष वीरेंद्र बैद, संरक्षक विजय गोयल, संगीतप्रेमी मोहनलालचितलांगिया, वरिष्ठ समाजसेवी जागीर चंद फरमा, विनोद बिहाणी, विजय अरोड़ा,प्रेम चुघ, राकेश मोंगा, सुनील शर्मा, सुनील अग्रवाल, राजेश झूंथरा,राजेश जैन, भूपेंद्रसिंह, ऋतुसिंह राजपूत, मनीराम सेतिया,छगनलाल शर्माआदि गणमान्य लोग उपस्थित रहे। राष्ट्रीय कला मंदिर के सचिव शिव जालान नेबताया कि कवि सुरेंद्र सुंदरम, दौलतराम अनपढ़, डॉ कृष्ण कुमार आशू,रूपसिंह राजपुरी, हरीश हैरी, डॉ. संदेश त्यागी, अरुण शैहरिया ताइर  नेहास्य कविताओं से खूब रंग जमाया। सुरेंद्र सुंदरम ने- स्वीकृति में सिरहिलाने वाले लोग एक दिन अस्वीकृति में जीभ हिलाना भी भूल जाते हैं.दौलतराम अनपढ़ ने-मेरी शादी री तीसवीं सालगिराह,इश्क के चक्र में पड़े तो पढ़ाई कहाँ होती है, 



मेरे सामने ही तो था उसका घर,ख़डी रहती थी वो मुंह फेरकर,हरीश हैरी ने-च्यारूं भाई एक ही तूळी सूं अजे ही सिलगावै बीड़ी,पण रोटियां सारूं घर में बण रेया है कई चूल्हा.डॉ कृष्ण कुमार आशु ने- तुम्हारा प्यार कविता पर भ्रष्टाचार की तरह बरसता है,और मेरा दिल नगर परिषद के छब्बीस परसेंट के लिए भी तरसता है...,अरूण शैहरिया ताइर ने- वो तो पढ़ लिख के बनी क्लास की टीचर मेरी,जिसके चक्कर में सदा फेल हुआ करता था



संदेश त्यागी ने-रंगीं नज़ारे हों मस्ती के नारे हों,हम उनसे हारे हों तो होती होली, शादी शुदा लोग मन में ये धारें कि हम भी कुंवारे हों तो होती होली... और रूप सिंह राजपुरी ने-छोरै नै छोरी दिखाण ले गया,देखतां ई बोल्यो,हाइट कम है, बाप बोल्यो-तू नी जाणै मैं जाणू मुसीबत जित्ती छोटी हुवै बित्ती आछी हुवै... हास्य रचनाएं सुनाईं।संदेश त्यागी  को उनकी पुस्तक घूमती जमीन के लिए पंडित जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी राजस्थान द्वारा पुरस्कृत करने पर शॉल ओढाकर व श्रीफल देकर सम्मानित किया गया।मंच संचालन योगराज भाटिया द्वारा किया गया। अध्यक्ष वीरेंद्र बैद ने सभी कवियों और उपस्थितजनों का स्वागत और सचिव शिव जालान ने  आभार व्यक्त किया।


 




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