विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई, 2023) पर विशेष - Special on World Population Day (July 11, 2023)

 विश्व जनसंख्या दिवस (11 जुलाई, 2023) पर विशेष




बढ़ती जनसंख्या देश व विश्व की प्रगति व अर्थव्यवस्था में बाधक किसी निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले लोगों की संख्या जनसंख्या कहलाती है। भारत की जनसंख्या निरन्तर तीव्र गति से बढ़ रही है, जो देश के विकास व अर्थव्यवस्था में बाधक है। विश्व में बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रण करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 11 जुलाई, 1987 को विश्व जनसंख्या दिवस मनाने की घोषणा की गई, तब से प्रतिवर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है, जिसका प्रमुख उद्देश्य पूरे विश्व में लगातार बढ़ती जसंख्या के दुष्परिणामों को समझना व सभी देशों के सहयोग से इसका हल निकालना है। 


सन् 1830 तक विश्व की जनसंख्या केवल 1 अरब थी, जो 1930 तक दो गुनी हो गई। 1960 तक 3 अरब व 1975 तक 4 अरब हो गई। सन् 1999 को विश्व जनसंख्या 6 अरब को पार करते हुए वर्तमान 2023 में 8.045 अरब पहुंच गई है। लगातार बढ़ती जनसंख्या पूरे विश्व के लिए गम्भीर समस्या है, जिसका चिंतन व हल हर देश करने में लगा है।

भारत देश का भौगोलिक क्षेत्रफल विश्व के कुल क्षेत्रफल का 2.4 प्रतिशत है तथा भारत में विश्व की कुल जनसंख्या का 16.87 प्रतिशत भाग निवास करता है। 



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भारत में 1872 में पहली बार जनगणना की गई थी, किन्तु प्रथम नियमित जनगणना 1882 में हुई थी। उस समय भारत की जनसंख्या 25.4 करोड़ थी। भारत में प्रत्येक 10 वर्ष बाद जनगणना होती रही है। उसके अनुसार 1901 में 23.83 करोड़, जो कि 2001 में बढक़र 107.7 करोड़ हो गई। प्रतिवर्ष 1.7 करोड़ की वृद्धि आस्ट्रेलिया की वर्तमान जनसंख्या के बराबर है। सन 2001 की जनगणना के अनुसार प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या 933 है। सन् 2016 में भारत की जनसंख्या 132 करोड़ थी, जबकि वर्तमान 2023 में भारत की जनसंख्या लगभग 1 अरब 42 करोड़ आंकी गई है। भारत देश की आबादी हर दस वर्ष में 17.64 प्रतिशत की दर से तीव्र गति से बढ़ रही है, जिस पर अंकुश लगाना जरूरी है। जनसंख्या में भारत पूरे विश्व में चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। चीन देश की आबादी 143 करोड़ है, जबकि अमेरिका की आबादी 33 करोड़ 94 लाख है तथा वह तीसरे स्थान पर है। 

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भारत देश में सबसे अधिक आबादी वाला प्रान्त उत्तरप्रदेश है तथा उसके बाद महाराष्ट्र व तीसरा स्थान आन्ध्रप्रदेश है। हमारे देश में प्रति मिनट 25 बच्चे जन्म लेते हैं। 15 फरवरी, 2000 में केन्द्र सरकार ने नई जनसंख्या नीति की घोषणा की, जिसके अनुसार सामाजिक व आर्थिक विकास के लिए जीवन में गुणात्मक सुधार किया जाना आवश्यक है। इसके साथ 11 मई, 2000 को ही माननीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय 100 सदस्यी ‘राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग’ का गठन उपाध्यक्ष ‘के.सी. पंथ’ की देखरेख में किया गया।

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बढ़ती हुई जनसंख्या से न केवल देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित होती है, अपितु देश में गरीबी, भुखमरी व अवास की समस्याऐं बढ़ रही है, जिससे आम आदमी का जीना मुश्किल हो रहा है। जनसंख्या वृद्धि के कारण प्राकृतिक संसाधनों का अत्याधिक दोहन होने से प्राकृतिक संतुलन दिन-प्रतिदिन बिगड़ता जा रहा है व देश का विकास बाधित हो रहा है तथा आर्थिक विकास पर ऋणात्मक प्रभाव पड़ रहा है। आवास की समस्या रोजगार की समस्या विकराल रूप ले रही है। देश में लगभग 34.6 प्रतिशत निरक्षर है। देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बढ़ती जनसंख्या पर अंकुश लगाना आवश्यक है। इसके लिए जनसंख्या शिक्षा एवं विकास कार्यक्रम को मूलत: जन सहभागिता एवं जन सहयोग आधारित बनाया जाना चाहिए। जनसंख्या के विस्फोटक परिणामों को जन-जागरण द्वारा जनता के सामने लाना छोटा परिवार सुखी परिवार की अवधारणा व परिवार कल्याण योजना की जानकारी देशवासियों को दी जानी चाहिए। विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में जनसंख्या वृद्धि पर गोष्ठियों, सेमीनार, निबंध व चित्रकला प्रतियोगिता, स्लोगन व नारे लिखवाना, रैलियां आयोजित करना, इसके साथ ही गाँवों व शहरों के मौहल्लों में नुक्कड़ सभायें, नाटकों व फिल्मों द्वारा परिवार परियोजना का महत्व बतलाना, जनसंख्या के दुष्परिणामों से जनता को रूबरू करवाना नितान्त आवश्यक है।

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जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रण करने के लिए कम उम्र में शादी पर रोक लगाना, बाल विवाह व कम उम्र में माँ बनने के खतरे समझाना, गर्भ निरोधक दवाईयों का सेवन करना, रोजगार के अवसर प्रदान करना व बालिका शिक्षा को बढ़ावा देकर एवं छोटा परिवार - सुखी परिवार (हम दो हमारे दो) की अवधारणा को बढ़ावा देकर जनसंख्या पर अंकुश लगाया जा सकता है। यदि जनसंख्या को गम्भीरता से न लिया गया तो भारत देश कुछ ही वर्षों में चीन देश को पछाड़ कर दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जायेगा व देश का विकास, आर्थिक व्यवस्था डगमगा जाएगी तथा भुखमरी, गरीबी फैलेगी। इसके लिए हम सभी देशवासियों को सरकार को सहयोग देकर इस दानव रूप धारण कर रही समस्या का सुलझाना होगा।


विश्व जनसंख्या दिवस मनाये जाने की सार्थकता तभी है, जब हम राष्ट्रीय जनसंख्या नीति के उद्देश्यों की प्राप्ति हेतु संकल्पबद्ध होकर, निष्ठापूर्वक प्रयास करें, अन्यथा यह दिवस मात्र औपचारिकता बनकर रह जाएगा।


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