संवेदना ,समर्पण, जोश व होश का संगम था भगत सिंह / Shaheed E Azam Bhagat Singh Jayanti 2023
सबसे पहला गुण संवेदनशीलता का था जो बहुत छोटी उम्र में झलकने लगा था। वे अपनी चाची, मां, दादी दादा के साथ जो बातें करते उनमें विशेष कर अंग्रेज सरकार के द्वारा किए जाने वाले शोषण अत्याचार के प्रति आक्रोश को प्रकट करने वाली होती थीं। बचपन में खेतों में बंदूकें बोने वाली बात हमने पढ़ी व सुनी है। इसी प्रकार 13 अप्रैल 1919 जलियांवाला बाग की घटना के समय केवल 12 साल की उम्र में अपने साथियों के साथ लाहौर से पैदल चलकर अमृतसर तक पहुंचना व वहां से उन शहीदों के खून से सनी मिट्टी को शीशी में डालना, स्वयं व अपने साथियों को कसम दिलाना की इस हत्याकांड का बदला अवश्य लिया जाएगा काकोरी के शहीदों की याद में लेख लिखना, साइमन कमीशन के विरोध में किए जा रहे विरोध प्रदर्शन में लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेना, मजदूरों के विरोध में बन रहे ट्रेड डिस्प्यूट एक्ट व स्वतंत्रता आंदोलन मेंशामिल लोगों के विरुद्ध बना रहे सेफ्टी एक्ट के विरुद्ध असेंबली में बिना छर्रे डाले बम गिरा कर परचे बांट कर बहरे कानों को आवाज सुनना व देशवासियों को जगाना उनकी संवेदनशीलता तथा बहादुरी के बहुत बड़े उदाहरण हैं।
इतने बड़े साम्राज्य को बदलकर समाजवादी सरकार बनाने के उद्देश्य से नौजवान भारत सभा बनाना, एच आर ए से वैज्ञानिक आधार पर एच एस आर ए संगठन बनाना उनकी समझ व संवेदना का शिखर था जो उनमें दूसरे साथियों की तुलना में अधिक उच्च स्तर पर था।
भगत सिंह होश( ज्ञान के शिखर )दर्शन के स्तर पर ऊंचा उठ चुका था । दर्शन के स्तर पर विचार करते समय किसी समस्या के वैज्ञानिक कारण को जानना, व्याख्या करना तथा उसका वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करना होता है ।यह भौतिकवादी द्वंद्व वादी दर्शन के ज्ञान के बिना संभव नहीं होता ।उसका वैज्ञानिक हल प्रस्तुत करना ही सबसे बड़ी चुनौती होती है। उन्होने भारत की प्रमुख समस्या शोषण, गरीबी, बेरोजगारी को देखकर, उनके कारणों को जानकर, उसका वैज्ञानिक हल प्रस्तुत किया।
इसलिए उन्होने लिखा कि देश में शोषण व गरीबी , बेरोजगारी का प्रमुख कारण मानव के द्वारा मानव का शोषण है जिसका अंत करना ही क्रांति होता है जो मेरा ध्येय है। यहां यह बता दें कि मानव के द्वारा मानव के शोषण से उनका अर्थ किसी व्यक्ति से जितना काम करवाया जाता है (उत्पादन या सेवा के क्षेत्र में) उसके बदले में उसका पूरा भुगतान नहीं किया जाता है जितना उसने पैदा किया होता है इस प्रकार उसे भुगतान नहीं की गई राशि को ही शोषण कहा जाता है तथा उस बचाई गई राशि को पूंजीपति अपना मुनाफा कहता है। इसे गुरू नानक देव जी ने हक पराया नानका, उस सूअर उस गाय कहा।यह व्यवस्था ही पूंजीवाद का मूल सूत्र है ,यही पूंजीवाद का आधार है जो शोषण ,गरीबी वअन्य सामाजिक समस्याओं का कारण बनता है इसको हल किए बिना अर्थात योग्यता अनुसार काम व काम के अनुसार दाम के नियम (समाजवाद) के बिना इन समस्याओं का हल नहीं किया जा सकता ।
वे लिखते हैं किअगर हम व्यव्स्था नहीं बदलते, केवल सरकार का प्रमुख बदलने से कोई बदलाव नहीं हो सकता ।इसलिए वे लिखते हैं कि अगर भारत सरकार का प्रमुख लॉर्ड इरविन की जगह सर् पुरुषोत्तम दास ठाकुरदास कोई भी बन जाए इससे मेरे देश का (मजदूर किसान का) भला नहीं हो सकता जो आज भी सत्य है ।इसलिए उन्होंने अपने संगठन का नाम भी हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी रखा असेंबली में पर्चे फेंकते समय भी समाजवाद जिंदाबाद ,साम्राज्यवाद मुर्दाबाद के ही नारे लगाए
इससे सिद्ध होता है कि उनके पास दार्शनिक स्तर का होश (ज्ञान )भौतिकवादी द्वंद्वावादी दर्शन था जिसके आधार पर वे किसी भी घटनाक्रम की व्याख्या व उसका वैज्ञानिक समाधान प्रस्तुत करते थे । इसी दर्शन के ज्ञान के आधार पर वे व्याख्या करते हैं कि विचारों को मारा ( कुचला)नहीं जा सकता केवल शरीर को मारा (कुचला) जा सकता है ।विचार तो इन भौतिक परिस्थितियों की उपज होते हैं इसलिए वे लिखते हैं कि हमने स्वतंत्रता आंदोलन को पैदा नहीं किया है बल्कि इस आंदोलन ने हमें पैदा किया है ।इसलिए जब तक शोषण वाली स्थिति (पूंजीवाद) रहेगा तब तक इसको खत्म करने वाले विचार भी पैदा होते रहेंगे। इस प्रकार उनका मकसद केवल हंगामा खड़ा करना ही नहीं था बल्कि पूंजीवादी, शोषणकारी व्यवस्था को पूर्ण रूप में बदलकर नई समाजवादी व्यवस्था स्थापित करना ही था ।यह सब दार्शनिक स्तर की समझ के बिना संभव नहीं होता।
उन्होंने किसी पवित्र उद्देश्य के लिए मरने की बजाय उस उद्देश्य के लिए जीने व काम करने को उचित माना है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि उनमें वे सभी गुण थे जो किसी भी संवेदनशील , बौद्धिक स्तर पर विकसित युवा के पास होने चाहिए ।सबसे बड़ा गुण संवेदनशील होना ,किसी घटना के प्रति संवेदना पूर्वक प्रतिक्रिया करना फिर उसके वैज्ञानिक कारणों को जानना व उसका वैज्ञानिक हल प्रस्तुत करना होता है । एक महान लेखक, चिंतक, साहित्यकार के तौर पर उन्होंने तत्कालीन व पूर्व इतिहास की घटनाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण किया । कूका आन्दोलन, फ्रांस की क्रांति, रूस की क्रांति ,जलियांवाला बाग हत्याकांड, काकोरी के शहीदों की गाथा ,राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन का विश्लेषण तथा भावी कार्यक्रम अपनी रचनाओं में प्रस्तुत किया ।छोटी सी उम्र में इतना अध्ययन मनन तथा लेखन व सजा तथा अत्याचार का सहन दुनिया के इतिहास की सबसे लंबी भूख हड़ताल (114 दिन )उनके व्यक्तित्व के परम गुण का सबूत है ।उन्होंने लिखा कि नौजवानों को भी हथियार उठाने की बजाय अध्ययन करना चाहिए यही जन चेतना को विकसित करने का मार्ग होता है ।जन चेतना के बिना कोई भी सामाजिक, राजनीतिक आंदोलन सफल होने संभव नहीं होते।
लखवीर सिंह एडवोकेट
अध्यक्ष अखिल भारतीय नौजवान सभा
राजस्थान
इस बात का अंदाजा हमें उनकी आखिरी दिनों में लिखी एक रचना क्रांतिकारी कार्यक्रम का मसविदा नाम की रचना में को पढ़ने से पता लगता है जिसमें वे लिखते हैं कि सामंतवादी व्यवस्था को समाप्त करना, किसानों के सारे कर्ज माफ करना ,केवल एक ही प्रकार का कर लेना ,सबके लिए समान शिक्षा का प्रबंध करना ,काम करने का दिन (काम के घंटे )आवश्यकता अनुसार कम करना हमारा प्रमुख लक्ष्य होगा ।जिस पर हमने समग्र रूप में आज भी ध्यान नहीं दिया जिस का खामियाजा हम आज भी भुगत रहे हैं। उनकी सामाजिक व्यवस्था के प्रति समझ इतनी विकसित थी कि वे सामाजिक कुरीतियां कुप्रथाओं जैसे छुआछूत आदि के बारे में भी बहुत स्पष्ट थे ।उन्होंने कहा कि यह कुप्रथाएं भी समाज में व्यापत गरीबी , असमानता के कारण ही पैदा होती हैं। उसके समाधान के लिए उन्होंने जेल में सफाई कर्मचारी बोघा सिंह से हर रोज मिलना, बातें करना और उसके हाथों की बनी रोटी खाने की मांग करना उनके चरित्र का बड़प्पन प्रस्तुत करता है तथा वे गरीबों, अछूतों की एकता का उदाहरण देते हुए प्रेरणा देते हैं कि उनकी एकता के बिना इन लोगों का राज स्थापित नहीं हो सकता अर्थात समाजवाद नहीं आ सकता।
उन्होंने किसी पवित्र उद्देश्य के लिए मरने की बजाय उस उद्देश्य के लिए जीने व काम करने को उचित माना है। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि उनमें वे सभी गुण थे जो किसी भी संवेदनशील , बौद्धिक स्तर पर विकसित युवा के पास होने चाहिए ।सबसे बड़ा गुण संवेदनशील होना ,किसी घटना के प्रति संवेदना पूर्वक प्रतिक्रिया करना फिर उसके वैज्ञानिक कारणों को जानना व उसका वैज्ञानिक हल प्रस्तुत करना होता है । एक महान लेखक, चिंतक, साहित्यकार के तौर पर उन्होंने तत्कालीन व पूर्व इतिहास की घटनाओं का वैज्ञानिक विश्लेषण किया । कूका आन्दोलन, फ्रांस की क्रांति, रूस की क्रांति ,जलियांवाला बाग हत्याकांड, काकोरी के शहीदों की गाथा ,राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन का विश्लेषण तथा भावी कार्यक्रम अपनी रचनाओं में प्रस्तुत किया ।छोटी सी उम्र में इतना अध्ययन मनन तथा लेखन व सजा तथा अत्याचार का सहन दुनिया के इतिहास की सबसे लंबी भूख हड़ताल (114 दिन )उनके व्यक्तित्व के परम गुण का सबूत है ।उन्होंने लिखा कि नौजवानों को भी हथियार उठाने की बजाय अध्ययन करना चाहिए यही जन चेतना को विकसित करने का मार्ग होता है ।जन चेतना के बिना कोई भी सामाजिक, राजनीतिक आंदोलन सफल होने संभव नहीं होते।
आज की परिस्थिति में प्रत्येक युवा उनकी अध्ययनशीलता , बौद्धिक श्रेष्ठता,वैज्ञानिक दर्शन की समझ को अपनाते हुए चेतना को विकसित कर देश की अधिकांश समस्याओं गरीबी , बेरोजगारी का एक झटके में ही समाधान कर सकते हैं कल्पना करें उनके भौतिकवादी द्वंद्वावादी दर्शन के अनुसार अगर उनके नाम पर केवल एक ही कानून भगत सिंह राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कानून(BNEGA )बना दिया जाए जिसके अंतर्गत प्रत्येक चाहने वाले को योग्यता अनुसार काम व काम के अनुसार दाम मिले ।जिसमें अकुशल को₹30000 अर्ध कुशल को₹35000 कुशल को 45000 रुपए तथा उच्च कुशल को₹60000 प्रतिमाह रोजगार प्रतीक्षा भत्ता मिलने की गारंटी हो ।इससे परिवारों की आय भी बढ़ेगी लोगों की क्रय शक्ति बढ़ेगी। अधिक उत्पादन करना पड़ेगा ,शिक्षा व चिकित्सा क्षेत्र में सेवाओं का विस्तार होगा ।लोगों का जीवन स्तर ऊंचा उठेगा। सबको रोजगार देने के लिए भगत सिंह के लेख में दिए गए विचार के आधार पर काम के घंटे या काम का दिन 8 घंटे से घटकर 6 घंटे करने पर 33% अधिक रोजगार सृजित होगा ।इससे हमारी अधिकांश समस्याएं हल हो सकती हैं। यही भगत सिंह के सपनों का भारत बनाने का वैज्ञानिक मार्ग है औरआज की सबसे बड़ी जरूरत भी है।
आओ !आज उनको श्रद्धांजलि के तौर पर इस कानून को बनवाने के लिए राष्ट्रीय आंदोलन के भागीदार बनें ।यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।अगर हम उनके इस प्रकार के अध्ययन करने, दार्शनिक स्तर तक की समझ वाले वाले उनके गुणों को लोगों की चेतना का हिस्सा बना पाए तो हर कोई चाहेगा की भगत सिंह हमारे घर में पैदा हो किसी और के घर में नहीं ।यही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी ।इंकलाब जिंदाबाद ।समाजवाद जिंदा बाद
लखवीर सिंह एडवोकेट
अध्यक्ष अखिल भारतीय नौजवान सभा
राजस्थान


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